एक ऐसा मंदिर जहाँ आज भी आते हैं महाकाल

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एक ऐसा मंदिर जहाँ आज भी आते हैं महाकालएक ऐसा मंदिर जहाँ आज भी आते हैं महाकाल

दोस्तों यह प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के जौनपुर  जिले से 17 किलोमीटर दूर बक्शा थाना छेत्र के अंर्तगत चूड़ामणिपुर ग्राम में स्थित है ,जो कि चतुर्मुखी शिवलिंग अथवा अर्धनारीश्वर प्रतिमा प्रतीत होती है।

इस मूर्ति की पहचान जनसामान्य में चम्मुख्बीर बाबा के नाम से एक ग्राम देवता के रूप में की जाती है।मूर्ति कला कि दृष्टी से यह मूर्ति अपने आप में एक बेजोड़ प्रस्तुति है ,एवं समान्यतः ऐसी मूर्ति का निदर्शन पूरे उत्तर – भारत में कम है इतिहासकारो नें जब इसे देखा तो इसे प्रथम दृष्टि में ही इसे गुप्तकालीन कृति माना है ।

इस मूर्ति पर प्रत्येक मंगलवार के अलावा श्रावण मास में भक्तों का रेला लगा रहता है ,ऐसा माना जाता है यहाँ लोगो की मान्यताये पुरी होती है औऱ मान्यताऐं पुरी होने पे लोग घंटीओ का चढ़ावा चढ़ाते हैं , ग्राम के लोगों का कहना है कि इस मंदिर में आज भी महाकाल आते हैं ,और कभी कभी यहां रातों को डमरू की आवाज भी आती है ,

तथा यहां के पुजारियों का कहना है कि आप इस मूर्ति को धागे की नाप से कभी भी नाप नहीं सकते हैं अगर आज आप नाप के जाएंगे और एक महीने बाद वापस आकर नापेंगे तो इसकी आकृति में आपको अंतर जरूर मिलेगा ,पुजारियों का ये भी कहना था कि उनलोगों ने सुना है कि बरसात में यहां मुहरें भी पाई जाती थी,इस मंदिर सी जुड़ी बहुत सी पहलुओं का गांव वालों ने और पुजारियों ने जिक्र किया ये मंदिर खुद में न जानें कितने राज समते हुए हैं जिसकी कल्पना कर पाना आसान नहीं है.

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