शासन बड़ी न पोस्ट सबसे बड़ा है नोट

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शासन बड़ी न पोस्ट सबसे बड़ा है नोट

चलो हफ्ता निकालो… मेरे आगे अच्छे अच्छे ऑफिसर पैसे लेकर चुप रहते हैं। ऐसे फिल्मी डायलॉग आपने बहुत सुना होगा लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसे ही लोग है जो अपने पद का इस्तेमाल गलत तरीके से करते हैं या यूं कह लें कि पद का दुरुपयोग करते हैं। वैसे लिखते समय हाथ तो कांपते हैं मगर क्या करें मीडिया से हैं साहब लिखना पड़ता है । हम ना लिखेंगे तो कौन लिखेगा ?

 

 

दरअसल मामला कहीं और नहीं जनपद जौनपुर का है जहां नगर के एक आलाधिकारी अपने पद का धौंस जमाकर मनमाने काम करवाने में लगे हैं । जब काम मनमाना होगा तो जेब में गांधी जी भी ज्यादा संख्या में होंगे। ठीक वैसे ही पैसे के बूते पर सरकारी जमीन को बिना नक्शा पारित किए अपने चहेतों को जमीन दिलवा रहें हैं। जिले में शासनादेश कि खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं लेकिन प्रतीत होता है कि शीर्ष पदाधिकारियों को कुछ पता ही नहीं है।

विशेष सूत्रों से पता चला है कि अधिकारी ने नखास मोहल्ले में प्रतिष्ठित चाट दुकान के बगल में एक व्यापारी नजूल की जमीन पर जबरिया कब्जा कर लिया है।
हालांकि व्यापारी के इस कब्जे में भाजपा के एक बड़े नेता का भी हाथ रहा है। बताया जाता है कि नेता जी सत्ता की हनक दिखा कर जनपद में खासा धनोपार्जन करते है। इसके बाद भी साहब यहीं नहीं रुके। मोटी रकम के एवज में जिला अस्पताल के पास महिला गेट के सामने नजूल की जमीन पर एक मेडिकल वाले को कब्जा करा दिया है।

जौनपुर

इसके बाद साहेब नें सदभावना पुल मार्ग पर एक व्यापारी को नजूल की जमीन पर कब्जा करा दिया है। शासनादेश है कि शाही किला से दो सौ मीटर के दायरे में चार मंजिला भवन का निर्माण नहीं किया जा सकता है लेकिन जेब भरने के चक्कर में साहब ने शाही पुल के पास सिपाह जाने वाले मार्ग पर दो सौ मीटर के अन्दर चार मंजिला भवन का निर्माण करा दिया है। यहां पर भवन निर्माण कराने वालों द्वारा सड़क पर अतिक्रमण करने के साथ ही नाली को भर दिया गया है

जिसके कारण गन्दा पानी सड़क पर बहता है। पीडब्लूडी विभाग ने सड़क को गड्ढा मुक्त किया पानी के कारण सड़क फिर गड्ढा युक्त हो गयी है । इसके लिए अपरोक्ष रूप से नगर के अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाये तो अतिशयोक्ति नहीं होगी । इसी तरह शहर में लगभग एक दर्जन स्थानों पर लोग साहब के शह नजूल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे है। साहब सेवा निवृत्त होने के पहले अपनी झोली नोटो से भर लेने की फिराक में है।

साहब के इस लूट पाट की खबरें कई बार सोशल मीडिया पर तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ लेकिन जिले के आला हुक्मरान साहब के लूट के खेल को गम्भीरता से नहीं ले रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या केवल यह रकम इन्हीं के हाथ आती है या किस्सा कुछ और भी है। लिहाजा आशा यही है कि कम से कम कुछ दिन ही सही जनता को जी लेने का अवसर साहब के द्वारा जनता को दिया जाए और पद का दुरुपयोग ऐसे कार्यों के लिए ना किया जाए जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचे।

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