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जब तक सूरज चाँद रहेगा ……………कहानी शहीद के शहादत् की

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जब तक सूरज चाँद रहेगा ……………कहानी शहीद के शहादत् की

जब तक सूरज चाँद रहेगा ...............कहानी शहीद के शहादत् की
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चारो तरफ रोने की आवाज , चीख पुकार , नारे जब तक सूरज चाँद रहेगा भ़ईया जी का नाम रहेगा …..

देशभक्ति गानों के बीच में जोर जोर के नारे अलग ही जोश पैदा कर रहे थे , लोग गमगीन थे लेकिन उनमें कुछ युवा ये भी महसूस कर रहे थे की काश उस सोये हुए इंसान(मृत) की जगह मैं होता ये नारे मेरे लिए भी लगते , कफ़न में तिरंगा मिलता , भीड़ होती मेरे पीछे , गाडि़यों का काफि़ला होता , मंत्री विधायक द़रवाजे दौड़ते , पुरे देश में नाम होता काश मैं भी शहीद होता।

वातावरण पुरी तरफ ग़मगीन हो उठा

तमाम् ऐसी स्थिति के साथ काफिला गंत्व्य स्थान को पहुँचा , नारे और देशभक्ति गाने की आवाज से क़ई गुना तेज़ चिल्लाने की और घिघियाने के आवाज से पुरा ब्रह्माण्ड गुँज पडा़ , कैमरा मैन लपके हृदयविदारक दृश्य को कैद करने के लिए , तो इधर नेतागण भी दौडे़ फोटो फ्रेम में जगह बनाने के लिए , कुछ समय के लिए सारे तरफ के मोबाईल के कैमरे भी फ्लैश और शटर आवाज बंद करके अपना काम करने लगे , वातावरण पुरी तरफ ग़मगीन हो उठा , सभी के आँखों में आँसु और सीने में देश प्रेम भर उठा , श्रद्धाँजली देने वालों का ताँता लग गया .

मंत्री जी ने 15 लाख मुआवजा देने का सार्वजनिक ऐलान किया

आम जनमानस देखने और मृत के साथ सेल्फी लेकर अपने फेसबुकिया अंदाज में श्रद्धाँजली देने के कार्य में लीन हो ग़ए तो वहीं दुसरी तरफ गणमान्य लोग भी आँखों में जब़रदस्ती आँसुओं के साथ तब तक पुष्पगुच्छ शहीद के चरणों पर नहीं रख रहे थे जब तक उनको यकीन न हो जाए की पत्रकार ने फोटो मन लायक खींच ली होगी , धीरे धीरे करूण क्रंदन कम हो रहा था.

अब भीड़ ये जानने को उत्सुक हो रही थी की सरकारी मुआवजा़ क्या और कितना मिला या मिलेगा , आँख सबकी सरसराहट भरी नज़रों से ढुँढ़ रही थी ऐसा ही कोई दृश्य देखने को , सफलता मिली आँखों को , क्या देखा ! मंत्री जी ने 15 लाख मुआवजा देने का सार्वजनिक ऐलान किया , नारे फिर अपनी रफ्तार पकड़ लिए परिवारजन नें भी नश्वर शरीर को अब उठा कर घाट के तरफ ले चलना उचित समझा , देशभक्ति गीत की आवाज़ बढा़ दी ग़ई , भीड़ ने नारों में वज़न लाया ,

कहानी शहीद के शहादत् की

थोडी़ देर में पार्थिव शरीर घाट पर था लोग शहीद के पार्थिव शरीर को देखने से ज्यादा बंदुकों की सलामी देखने को अब उत्सुक थे , राष्ट्रगान की धुन बजी लोगों ने जैसे तैसे 52 सेकेण्ड संयम बनाया , जवानों ने अपने साथी को साफ हृदय से आखरी सलामी दी , आसमान बंदुकों के आवाजों से थर्रा उठा , भीड़ के कुछ बन्तु देशभक्त फेसबुक / व्हाट्स़ऐप / इंस्टाग्राम पर लाईव आकर अपने देशभक्त होने का प्रमाण देने लगे , चिता को मुखाग्नी दी ग़ई लोग सर झुका कर यह दृश्य देखते हुए धीरे धीरे ऐसे सरकने लगे जैसे इनका बस इतना ही काम रहा हो ……

शोशल मीडिया पर देश भक्तो का रेला लग गया

शोशल मीडिया पर कुछ छिट फुटिया नेताओं को उपस्थित होने पर सर्वश्रेष्ठ नेता होने का गरीमा भी प्राप्त हो गया वे गद् गद् थे और वहाँ का दृश्य भी उनकी दिल , दिमाग से अब धीरे धीरे बढ़ते कदमों के साथ ओझल हो रहे थे समय बीतता गया लोग इस वाक्या को भुलते ग़ए अपने निजी जिंदगी में व्यस्त हो ग़ए फिर एक शाम को एक महानुभाव सब्जी खरीदने निकले , एक छोटी सी दुकान पर जाकर सब्जियों के मोल भाव करने लगे और सही सही रेट लगाने के लिए सब्जी वाली को धमकियाये , वे बेचारी इनकी धमकी का सम्मान करते हुए सही रेट में देने का वचन दी और आँखों में आँसु और सब्जी के बिकने के उम्मीद लिए सवाल कि साहब ! क्या क्या और कितना कितना दुँ ?

तुम वही हो ना जो उस दिन शहीद के घर पर थी

साहब ने उसके चेहरे को देखा और याद करने की कोशिश की …..अरे ! यह तो वही है ना जो उस दिन शहीद के घर दहाडे़ मारकर रोते हुए बेहोस हो ग़ई थी ? हाँ ये वही ही है साहब खुद को स्पष्ट करते हुए सवाल पुछ बैठे कि “तुम वही हो ना जो उस दिन शहीद के घर पर थी ??” सब्जी वाली स्त्री चुप हो ग़ई आँसुओं के रफ्तार बढ़ ग़ए , जवाब देने से अच्छा उठकर जाना चाहती थी वो , परन्तु कहाँ और कब तक? ये सवाल और शहीद के अंतिम दिन का दृश्य नाँचने लगा उसके जे़हन में , ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने सीने पर मुक्का दे मारा हो ।

तब तक साहब ने फिर सवाल को दोहरा कर स्त्री का ध्यान तोडा़ ।
स्त्री अब तक कुछ आँसुओं को पोछ और कुछ को पी चुकी थी ,
साहब ने सवाल दोहराया कौन थी तुम उस शहीद की ? क्या रिश्ता था तुम्हारा उनसे ?

“पत्नी थी मैं उनकी” जवाब सुनते ही मानों चारों तरफ एक अजी़ब सा सन्नाटा छा गया हो मानो अपनी आत्मा खुद झकझोर के पूछ रही हो कि नारों में किस सूरज और चाँद की बातें हो रही थी

                                                                                                  _लेखक राना सिंह_

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