आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद ईशा हॉस्पिटल में नहीं हुआ इलाज

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आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद ईशा हॉस्पिटल में नहीं हुआ इलाज


 

 

कागजों पर आयुष्मान के चर्चे , अस्पतालों में रोगियों के खर्चे

जौनपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्त्वाकांक्षी योजना आयुष्मान भारत गरीबों के गंभीर इलाज में मदद के लिए शुरू की गई है । यह योजना कागजों पर तो खूब सुर्खियां बटोर रही हैं परन्तु असल हकीकत तो डॉक्टर बता रहे हैं । चौंकिए मत , कार्ड में तो कोई खराबी नहीं लेकिन जब रोगी डॉक्टरों के पास पहुंच रहा तो डॉक्टर साहब बस कैसे भी करके रोगियों से पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं।

ऐसा ही मामला हुआ है जौनपुर के मल्हनी के एक व्यक्ति केसाथ । दरअसल इनका नाम जान मुहम्मद है जिनकी उम्र तकरीबन 55साल है । जान मुहम्मद अपने आयुष्मान कार्ड को लेकर इशा नाम के हॉस्पिटल गए। यहां डॉक्टर ने हजारों रुपए लेकर जांच करने की बात कही । रिपोर्ट में लिवर, पथरी , और हृदय से संबंधित कई बड़ी बीमारियां सामने आयी। रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने रोगी की बेटी से कहा कि यहां तुम्हारा इलाज नहीं हो सकता क्योंकि खर्च तुम नहीं वहन कर सकती और बाद में रोगी को सदर अस्पताल रवाना कर दिया।

वीडियो में सुने मरीज ने क्या कहा ?

सदर अस्पताल में रोगी के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद तकरीबन 600रुपए की बाहरी दवा और कुछ अंदर से दवाएं दी गई । पूछने पर डॉक्टर ने कहा कि 5-6 दिन बाद आना और इस दवा से सारी बीमारियां मल के द्वारा बाहर निकल जाएगी ।हमारे रिपोर्टर जब इशा हॉस्पिटल के बारे में पता किए तो पता चला कि यह हॉस्पिटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत आता है । ऐसे में सवाल यही उठता है कि जब सरकार ने इन अस्पतालों को आयुष्मान योजना में शामिल किया है तो फिर रोगियों के जिंदगी से क्यूं खेला जाता है । यदि इस रोगी के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती तो क्या ऐसे अस्पताल जिम्मेदारी लेते ?

सदर अस्पताल ने भी कहीं ना कहीं से रोगी से पूर्णतः पीछा छुड़ाने की कोशिश की ।जब सरकारी दवाएं अस्पतालों में आती है व्यक्ति आयुष्मान कार्ड धारक है और जन औषधि जैसी योजनाएं प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई है तो फिर क्यूं गरीबों की जिंदगियों से खेला जाता है ।

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