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रोहिंग्या मुसलमानों ने भारतीय नागरिकता को लेकर, रची ये साजिश…

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रोहिंग्या मुसलमानों ने भारतीय नागरिकता को लेकर, रची ये साजिश… 

 

Radha Singh | 24-07-2020

रोहंगिया मुसलमान
फ़ोटो गूगल

जहां मोदी सरकार घुसपैठियों पर लगाम लगाने के लिए एक के बाद एक कदम उठाने में लगी हुई है तो वहीं भारत में अवैध रूप से रह रहे अफगानी और रोहिंग्या मुसलमान की एक बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। किस तरह से ये लोग भारत की नागरिकता पाने के लिए हथकंडा अपनाने में लगे हुए हैं। जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।

 

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जी हां, नागरिकता संशोधन कानून से बचने के लिए भारत में रह रहे कई अफगानी और रोहिंग्या मुसलमानों ने ईसाई धर्म को अपना लिया है ताकि उनकी भारतीय नागरिक बनने की राह आसान हो जाए। ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार को इस बारे में जानकारी दी है कि अफगान मुसलमानों के ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के लगभग 25 मामले हाल में सामने आए हैं. दक्षिणी दिल्ली में एक अफगान चर्च के प्रमुख, आदिब अहमद मैक्सवेल ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि सीएए के बाद, धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले अफगान मुसलमानों की संख्या में तेजी आई है।

 

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दरअसल, नागरिकता संशोधन अधिनियम 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ था। इस कानून में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है।

 

 

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ऐसे में रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं, जिन्होंने बांग्लादेश के माध्यम से भारतीय भूमि में प्रवेश किया है, इसलिए भारत सरकार ने उन्हें स्वीकार करने और उन्हें भारतीय नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। इस तरह से भारत रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से भी बाध्य नहीं है।

 

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पिछले साल दिसंबर में नागरिकता संशोधन विधेयक की बहस के दौरान संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने देश में रोहिंग्याओं को स्वीकार करने के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय कानून भारत पर एक संप्रभु देश के रूप में बाध्यकारी नहीं होंगे।

दरअसल भारत शरणार्थियों पर हुए 1951 के कन्वेंशन, और न ही 1967 के किसी प्रोटोकॉल का हिस्सा है। इसलिए, कोई भी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। इसके बावजूद भारत अंतरराष्ट्रीय समझौतों को ध्यान में रखता है। रोहिंग्या आर्थिक लाभ हेतु भारत पहुँचने के लिए बांग्लादेश को एक सुरक्षित ठिकाने की तरह इस्तेमाल करते आए हैं। इस तरह से ये स्पष्ट रूप से, भारत में प्रवेश करने पर उन्हें आर्थिक प्रवासी बनाता है, ना कि अल्पसंख्यकों पर उत्पीड़ित प्रवासी।

 

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वैसे भी अवैध अप्रवासियों को पता है कि उन्हें भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी, इसलिए वे अब ईसाई धर्म अपना रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 1 लाख 50 हजार से लेकर 1 लाख 60 हजार अफगानी मुसलमान दिल्ली के ईस्ट कैलाश, लाजपत नगर, अशोक नगर और आश्रम में रहते हैं।इसके अलावा, आधिकारिक अनुमान बताते हैं कि लगभग 40,000 रोहिंग्या मुसलमान पूरे भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या जम्मू और कश्मीर में है।

इन प्रवासियों की एक बड़ी तादाद 2012 से पहले भारत में रह रही है और अब ईसाई धर्म अपनाते हुए बांग्लादेश से होने का दावा कर रही है। जो देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। ये तो सही कि वक्त रहते ही अवैध रूप से भारत में रह रहे इन लोगों के ईसाई धर्म अपनाने वाली साजिश का खुलासा हो गया। नहीं तो ये काफी खतरनाक हो सकता था।

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