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युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती पर विशेष- “अटल जी का जौनपुर सफ़र”

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जैसा कि पूरा देश जानता है आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती है। उनका जन्म 25 दिसंबर सन् 1924 को गुलाम भारत के ग्वालियर राज्य में हुआ था, जो अब मध्य प्रदेश का एक भाग है। सन् 1996 में वे पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने थे और ‌तीन बार इस पद पर कार्यरत रहे। बिहारी जी के व्यक्तित्व को हम शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते, वह एक ऐसे राजनेता थे जिनका सम्मान हर राजनीतिक दल पूरे दिल से करता था।

इतना ही नहीं वह एक कुशल वक्ता भी थे और जब संसद में किसी विषय विशेष पर वह चर्चा करते थे तो केवल पक्ष ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेता भी उनकी बातों को गौर से सुनते और गंभीरता से लेते थे। अटल जी के तो विरोधी तक उनके इतने ज़्यादा कायल थे कि वह सब कहते थे कि वाजपेयी जी बहुत अच्छे इंसान हैं बस उन्होंने अपने लिए गलत पार्टी का चयन कर लिया है। उनकी सबसे विशेष प्रतिभा थी – कविता प्रेम। अटल जी ने “मौत” के विषय में अपने जीवन में सबसे अधिक लिखा और उनके मरणोपरांत उनकी सबसे चर्चित कविता यही रही कि “मौत से ठन गई”

मौत से ठन गई

ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यूँ लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई,

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं,

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फ़िर मुझे आज़मा,

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर,

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं,

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला,
देख तेवर तूफाँ का, तेवरी तन गई,

ठन गई!
मौत से ठन गई!

Source : Kavitakosh

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