गठबंधन के लिए भतीजे अखिलेश को भेजे गए प्रस्ताव के जवाब का इंतज़ार कर रहे चाचा शिवपाल, बोले केवल चुनाव के लिए ऐसा नहीं कर रहा हूँ

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उत्तर प्रदेश। यूपी (UP) में चुनाव काल (Election time) नजदीक आते ही नेताओं (leaders) के बीच तैयारियाँ भी जोरों-शोरों से होनी शुरू हो गई हैं। और खास कर जब बात उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चुनाव की हो तो हर पार्टी का नेता इस गद्दी को पाने के लिए अपनी पूरी जान झोंक देता है। जोड़-तोड़ की गणित के साथ जातीय समीकरण (caste equation) बैठाने का काम शुरू हो चुका है।

ब्राह्मणों (brahmins) को लुभाने के लिए जहाँ बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) ब्राह्मण सम्मेलन (brahmin convention) कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (Samajvadi Party) भगवान परशुराम (God Parashuram) की मूर्तियाँ (monuments) लगवा रही है। इस बीच, अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने भी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिश की और जेल (jail) में बंद ब्राह्मण विधायक (Brahmin MLA) और एक एमएलसी (MLC) से मुलाकात की। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) ने रविवार को कहा कि वर्तमान में ब्राह्मणों का मुद्दा तो सभी दल (party) उठा रहे हैं लेकिन समुदाय (Community) की सुध केवल उनकी पार्टी ले रही है।

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समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा (news agency PTI- language) के मुताबिक, शिवपाल यादव ने कहा, “हम सपा (SAPA) से गठबंधन (alliance) के लिए पहले से ही प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है।” उन्होंने कहा, “लोग कह रहे हैं कि चुनाव (Election) आते ही हमने इसके प्रयास किए हैं, जबकि ऐसा नहीं है। हम इसके लिए बहुत पहले से ही प्रयास कर रहे हैं।” शिवपाल सिंह आगरा (Agra) की केंद्रीय कारागार (Central Jail) में बंद भदोही (Bhadohi) के विधायक विजय मिश्रा (MLA Vijay Mishra) और एमएलसी कमलेश पाठक (MLC Kamlesh Pathak) से मिलने आए थे।

यादव ने कहा, “विधानसभा चुनाव (Assembly elections) आते ही ब्राह्मणों का मुद्दा सभी पार्टियाँ उठाने लगी हैं, जबकि ब्राह्मणों की सुध केवल प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (Pragatisheel Samajvadi Party) ने ही ली है।” उन्होंने कहा, “जेल में भी हम ही उनसे मिलने आए हैं। इन दो ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों से मिलने अब तक किसी पार्टी का प्रतिनिधि (party representative) नहीं आया।” चाचा शिवपाल के इस बयान के बाद अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का क्या फैसला होता है यह देखने की बात होगी। मगर फ़िलहाल में अपनी जीत हासिल करने के लिए हर पार्टी पूरे जी जान से लगी हुई है।

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