वाराणसी में जल्द ही शुरू होगी रोपवे सेवा, अब कुछ ही मिनटों में कैंट से विश्वनाथ धाम व गंगा घाट पहुँच सकेंगे पर्यटक

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वाराणसी। पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने वाराणसी (Varanasi) में ट्रांसपोर्ट सिस्टम (transport system) पर कुछ नया प्लान करने को कहा था, जिसके बाद उपक्रम राइट्स (venture rights) ने यहाँ पर रोपवे (rope way) बनवाने का सुझाव दिया। बाद में इसका पूरा सर्वे (survey) कर रिपोर्ट (report) तैयार की गई।

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अब ये रिपोर्ट भारत सरकार (Indian government) के अर्बन डेवलेपमेंट मंत्रालय (Ministry of Urban Development) को भेजी जाएगी और यहाँ से हरी झंडी मिलते ही करीब एक महीने के भीतर रोपवे की आधारशिला वाराणसी में रखी जा सकती है। गंगा (Ganga), घाट (Ghat), गलियों वाली पौराणिक काशी (Legendary Kashi) तरक्की के साथ कदमताल करते हुए आधुनिक (Modern) हो रही है। लेकिन शहर के मुख्य रास्तों में चौड़ी सड़कें न होने और गाड़ियों की संख्या बढ़ने के कारण अक्सर जाम (Jam) के हालात सैलानियों (tourists), पर्यटकों (tourists) और लोगों की दिक्कतें बढ़ा देता है।

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ऐसे में लंबे समय से शहर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम (public transport system) के लिए नए विकल्प की खोज चल रही थी जिसका एकमात्र उपाय रोपवे निकाला गया है। रोपवे के लिए पहले फेज़ (phase) में पाँच किमी का रूट तय हुआ है, जो कैंट रेलवे स्टेशन (Cant railway station) से गोदौलिया (Godaulia) तक होगा। इस रूट में दो से तीन स्टेशन (station) बनाए जा सकते हैं।
अभी स्टेशन, लागत (investment), किराया (Rent), यात्रियों की क्षमता आदि तमाम सारी बातों का मंथन होना बाकी है।

इस रूट को इसलिए पहले फेज़ में चुना गया क्योंकि हर रोज़ वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन से बड़ी संख्या में टूरिस्ट और सैलानी आकर विश्वनाथ मंदिर (Vishwanath temple) में दर्शन करते हैं और गंगा आरती और घाट की छठा निहारते हैं। ऐसे में बिना किसी जाम में फँसते हुए आसानी से कम समय में यात्री गोदौलिया पहुँच जाएँगे। रोपवे की मदद से न केवल पर्यटकों को जाम से निजात मिलेगी बल्कि उनका समय भी बचेगा।

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