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महंत नरेंद्र गिरि की हत्या का सुराग तलाशने जौनपुर में कभी भी धमक सकती है सीबीआई की टीम

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महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अभिषेक मिश्र का खुटहन के बिशुनपुर गांव में है पैतृक आवास

बालपन से ही सानिध्य में रहकर उनका शिष्य अभिषेक बन गया करोड़पति जौनपुर। प्रयागराज जनपद के अखाड़ा के महंत नरेंद्र गिरि की हत्या का राज तलाशने के लिए सीबीआई की टीम जौनपुर जनपद में कभी भी धमक पड़ सकती है। जौनपुर के खुटहन थाना अंतर्गत बिशुनपुर गांव से महंत गिरी का गहरा रिश्ता है। क्योंकि इसी गांव निवासी महंत के शिष्य अभिषेक मिश्र के यहाँ बीते 15 मई को शाही अंदाज में आयोजित तिलकोत्सव कार्यक्रम में महंत नरेंद्र गिरि स्वयं आये थे।

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ऐसे में महंत के शिष्यों और उनके बेहद नजदीकी रहने वाले लोगों से पूछताछ के लिए सीबीआई की टीम हर थ्योरी को खंगालने में जुट गई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि उसी कड़ी को जोड़ने के लिए सीबीआई की एक टीम उनके शिष्य अभिषेक मिश्र के पैतृक गांव में कुछ साक्ष्य सबूत जुटाने और लोगों से पूछताछ करने के लिए जल्द ही आने वाली है। ऐसी चर्चा पूरे इलाके में बनी हुई है।

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दरअसल बिशुनपुर गांव उस समय चर्चा में आ गया जब महंत का एक युवा शिष्य है, जो इसी गांव का निवासी है। अभी साल भर पूर्व ही उसने गाँव में करोड़ो खर्च कर आलीशान मकान बनाकर अपना तिलकोत्सव किया था। जिसमें स्वयं महंत नरेंद्र गिरि और प्रयागराज के कुछ चुनिंदा राजनीतिक हस्तियां, बड़े धन्ना सेठ भी पधारे हुए थे। शाहगंज तहसील के खुटहन थाना क्षेत्र अंतर्गत उक्त गाँव निवासी सत्यप्रकाश मिश्रा गाँव की बाजार में किराना और पशुअहार की दुकान कर परिवार का गुजारा करते थे। उनके दो पुत्र बड़ा अंबुज और छोटा अभिषेक मिश्रा है। दोनों भाई बचपन में ही शिक्षा दीक्षा के लिए प्रयागराज चले गए।

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जहाँ 12 वर्ष की अवस्था में अभिषेक मिश्रा बाघंबरी अखाड़े से जुड़ गया। इसी दौरान वह महंत नरेंद्र गिरि के संपर्क में आ गया। फिर वह महंत के साथ ही रहने लगा। अधिकतर ग्रामीण उनके बिषय में बस यही जानते थे कि वह प्रयागराज में रहकर पढ़ाई कर रहा है। लगभग दो वर्ष पूर्व ग्रामीण तब हतप्रभ रह गये, जब अभिषेक गांव आकर मकान बनाने की योजना बनाने लगा।

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नक्से के अनुसार इसके लिए दो एकड़ भूभाग की आवश्यकता थी। जबकि उनके पास वहां दो बीघे जमीन ही उपलब्ध थी। बताते है की बगल के किसान से एक बीघे जमीन का अदला बदला किया गया। उसे संतुष्ट करने के लिए उतनी ही जमीन के अलावा दस लाख रूपया भी दिया गया था। लगभग दो एकड़ भूभाग में बने आलीशान भवन की कीमत तीन करोड़ से अधिक आंकी जा रही है। महंत की संदिग्ध मौत के बाद उनके शिष्य को लेकर चर्चाओ का बाजार गर्म है।

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