“डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं” इस कहावत को सच करने वाली बांदा की एक डॉक्टर की बताते हैं आपको पूरी कहानी….

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उत्तर प्रदेश। यूपी (UP) के जिला बांदा (Banda) के मरका गाँव में रहने वाली मीना देवी पत्नी प्रदीप को समय से पहले प्रसव पीड़ा (pain during pregnancy) होने पर उसके परिजनों ने 6 अक्टूबर की रात लगभग 10 बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज (Government Medical College) में भर्ती कराया। मीना का ऑपरेशन उसी रात को 2 बजे डॉक्टर नीलम सिंह ने किया।

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डॉ. नीलम बताती हैं कि मीना देवी को 9 माह से पहले ही प्रसव पीड़ा होने लगी थी। इससे पहले भी उसका पहला बेटा ऑपरेशन (operation) से हुआ था और अब वहीं ऑपरेशन के टाँकों पर दर्द होने लगा था। डॉक्‍टर नीलम ने बताया कि, ‘यहाँ महिला मरीज की देखभाल के लिए वृद्ध पिता राजेंद्र तिवारी निवासी ग्राम दोहा देहात कोतवाली मौजूद थे।

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इस बीच महिला को खून (blood) की कमी हो गई और उसे तत्काल खून की जरूरत थी। ऐसी स्थिति में मरीज की जान बचाना मेरा कर्तव्य (Duty) था। तो मैंने तत्काल अपना खून देकर मरीज को चढ़ाया।’ डॉक्टर (doctor) नीलम की अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा देखकर वहाँ मौजूद सभी लोग उनकी वाहवाही करने लगे।

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