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भारत-पाकिस्तान के बीच फँसे युवक के बच्चों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा, लगाई मदद की गुहार

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के समक्ष एक अनोखा मामला पहुँचा है, जिसमें एक शख्स को भारत (India) ने पाकिस्तानी नागरिक (Pakistani national) घोषित कर दिया है और पाकिस्तान निर्वासित (exiled) करने का फैसला (Decision) भी कर दिया। लेकिन पाकिस्तान की इमरान खान सरकार (Imran Khan government) उसे स्वीकार नहीं कर रही है।

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इस कारण वो दोनों देशों के बीच गतिरोध (deadlock) के कारण जेल की सजा (prison sentence) पूरी करने के बाद भी हिरासत केंद्र (detention centre) में बंद है। परिवार से सात साल से दूरी के बावजूद मामला हल न होते देख उसके बच्चों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अदालत (court) द्वारा उसे पाकिस्तानी नागरिक घोषित किया गया था और भारत में अवैध प्रवेश (illegal entry) की वो सजा (punishment) भी भुगत चुका है।

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वो अब हिरासत केंद्र में है, क्योंकि पड़ोसी देश ने उसे अपना नागरिक नहीं माना है और अब इस व्यक्ति के बच्चों ने उसकी रिहाई (release) के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। कोर्ट ने कहा, ‘हमने फाइल (file) देखी है, इस मामले में क्या किया जा सकता है..?

वैसे भी नागरिकता (citizenship) के मुद्दे पर क्या हो रहा है, यह देखने के लिए हम नोटिस जारी (notice issued) कर रहे हैं। दो सप्ताह में इस पर जवाब दाखिल किया जाएगा। ‘पीठ ने केंद्र (central) और यूपी सरकार (UP government) से जवाब माँगा और इसे 28 फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (listed) किया। पारिख ने कहा कि कमर अपनी सजा पूरी करने के बाद पिछले सात साल से एक हिरासत केंद्र में बंद है और उसे अपने परिवार के साथ रहने के लिए रिहा (released) किया जा सकता है।

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