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चुनाव हारने के बाद भी आख़िर केशव प्रसाद मौर्य को क्यों मिली डिप्टी सीएम की गद्दी, जानिए क्या है इसके पीछे कारण..??

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लखनऊ। हालिया विधानसभा चुनाव (recent assembly elections) हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) को उप मुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) बनाए रखना उनकी लोकप्रियता और पिछड़े वर्गों (backward classes) में उनकी पकड़ को प्रदर्शित करता है। राजनीतिक विश्लेषकों (political analysts) के मुताबिक, पिछड़े वर्गों के समर्थन ने भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janata Party) को हालिया विधानसभा चुनाव में राज्य में सत्ता बरकरार रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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राज्य में दूसरी बार उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले मौर्य (52) विधानसभा चुनाव में सिराथू (Sirathu) से पार्टी के उम्मीदवार थे, लेकिन करीब सात हज़ार मतों से वह पराजित हो गए। मौर्य की हार के बाद मंत्रिमंडल (cabinet) में उन्हें जगह मिलने या नहीं मिलने के बारे में कयास लगाये जा रहे थे, लेकिन उनके शपथ (oath) ग्रहण करने के साथ ही यह साफ हो गया कि पार्टी में उनकी अहमियत तनिक भी कम नहीं हुई है।

उनका जन्म कौशांबी (Kaushambi) जिले के सिराथू कस्बे में हुआ था। भाजपा सूत्रों के अनुसार, मौर्य ने बचपन में अपने माता-पिता का खेती-बारी में हाथ बँटाया, चाय की दुकान चलाई और समाचार पत्र भी बेचे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अशोक सिंहल के मार्गदर्शन में राजनीति (politics) में सक्रिय हुए और अपनी एक अलग पहचान बनाई। मौर्य ने भी हिंदुत्व (Hindutva) के एजेंडे को ऊपर रखा। वह विहिप और बजरंग दल (Bajrang dal) में 18 वर्षों तक प्रचारक भी रहे। मौर्य 2002 और 2007 में इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से चुनाव में मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। इसके बाद संगठन में उन्होंने अपनी सक्रियता बढ़ाई।

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भाजपा ने 2012 में मौर्य को सिराथू विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और वह चुनाव जीत गए। मौर्य जब सिराथू में भाजपा उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते थे तब आसपास के जिलों में अधिकांश सीटों पर उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2013 में मौर्य ने इलाहाबाद (Allahabad) के एक कॉलेज में ईसाई धर्म प्रचारक के आने के विरोध में प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। श्री राम जन्मभूमि (Shri Ram Janmbhoomi) और गोरक्षा आदि आंदोलनों के दौरान मौर्य जेल भी गए थे।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में मौर्य को पार्टी ने फूलपुर (Phoolpur) से उम्मीदवार बनाया और वह रिकार्ड मतों से चुनाव जीत गए। इसके बाद, उन्हें 2016 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) भाजपा का अध्यक्ष (BJP President) बनाया गया। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मौर्य ने राज्य भर का व्यापक दौरा कर पिछड़े वर्गों का समर्थन जुटाया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक नया कीर्तिमान बनाया। यूपी की 403 विधानसभा सीटों में पार्टी ने 312 और सहयोगी दलों ने 13 सीटें जीत ली। और मौर्य को पिछली सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया गया था।

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