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21 अप्रैल ‘आज का राज ‘ – देखिए कुछ खास

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21 अप्रैल ‘आज का राज ‘ – देखिए कुछ खास

 

Saumya Tiwari | 21-04-2020

 

21 अप्रैल
Photo Source Google

इंद्रकुमार गुजराल

 

21 अप्रैल 1997 में भारत के 12 वें प्रधानमंत्री ने शपथ ली थी। आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा गया है ।  इंद्रकुमार गुजराल स्वंतंत्रता संग्राम में काफी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया करते थे। अतः भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान यह जेल भी गए थे।भारत के प्रधानमंत्री बनने से पहले इन्होंने केन्द्रीयमंत्रिमंडल में बहुत से पदों पर काम किया। यह संचार मन्त्री, संसदीय कार्य मन्त्री, सूचना प्रसारण मन्त्री, विदेश मन्त्री और आवास मन्त्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

 

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राजनीति में आने से पहले उन्होंने कुछ समय तक बीबीसी की हिन्दी सेवा में एक पत्रकार के रूप में भी काम किया था।जिस समय  इन्दिरा गान्धी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मन्त्री थे उसी समय यह बात सामने आयी थी कि 1971 के चुनाव में इन्दिरा गान्धी ने चुनाव जीतने के लिये असंवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया है। इन्दिरा गान्धी के बेटे संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश से ट्रकों में भरकर अपनी माँ के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिये दिल्ली में लोग इक्कठे किये और इंद्रकुमार गुजराल से दूरदर्शन द्वारा उसका कवरेज लेने को कहा। गुजराल जी ने इसे मानने से मना कर दिया क्योंकि संजय गांधी कोई सरकारी पद पर नही थे। इस कारण से उन्हें सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय से हटा दिया गया और विद्याचरण शुक्ल को यह पद सौंप दिया गया।

 

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लेकिन बाद में उन्हीं इन्दिरा गान्धी की सरकार में मास्को में राजदूत के तौर पर गुजराल ने 1980 में सोवियत संघ के द्वारा अफ़गानिस्तान में हस्तक्षेप का विरोध किया। उस समय भारतीय विदेश नीति में यह एक बहुत बड़ा बदलाव था। उस घटना के बाद ही आगे चलकर भारत ने सोवियत संघ द्वारा हंगरी और चेकोस्लोवाकिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का विरोध किया।गुजराल जी के पिता का नाम अवतार नारायण और माता का पुष्पा गुजराल था। उनकी शिक्षा दीक्षा डी०ए०वी० कालेज, हैली कॉलेज ऑफ कामर्स और फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज लाहौर में हुई थी। यंग ऐज में ही वे भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में शरीक हुए और “अंग्रेजो भारत छोड़ो” अभियान में जेल भी गये। इनके अंदर स्वराष्ट्र प्रेम बचंपन से था।

 

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इन्होंने बहुत सी भाषाएं सीखी जैसे हिन्दी, उर्दू और पंजाबी इत्यादि , और तो और ये शेरो-शायरी में काफी दिलचस्पी रखते थे । गुजराल की पत्नी शीला गुजराल का निधन 11 जुलाई 2011 को हुआ। इनका परिवार एक छोटे मॉडर्न फैमिली वाला था। इनके दो पुत्र हैं जिसमे से एक नरेश गुजराल राज्य सभा सदस्य है और दूसरा बेटा विशाल है। गुजराल साहेब का एक छोटे भाई भी है जिनका नाम सतीश गुजराल है । यह एक विख्यात चित्रकार तथा वास्तुकार भी हैं।30 नवम्बर 2012 को गुड़गाँव के मेदान्ता अस्पताल में गुजराल का निधन हो गया। गुजराल जी लम्बे समय से डायलिसिस पर चल रहे थे ।

 

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19 नवम्बर 2012 को सीने में संक्रमण के बाद उन्हें हरियाणा के गुड़गाँव में एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ इलाज के दौरान ही उनकी हालत और खराब होती चली गयी। 27 नवम्बर 2012 को वे बेहोश हो गये। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। अंततः 30 नवम्बर 2012 को वो हम सबको छोड़ कर चले गए । चूंकि हमारे 12 वे प्रधानमंत्री थे वो तो उनके निधन का समाचार मिलते ही लोक सभा व राज्य सभा स्थगित हो गयी और इस अवसर पर राष्ट्रीय शोक की घोषणा के साथ भारत के राष्ट्रपति एवं प्रधान मंत्री ने शोक व्यक्त किया।जनता उन्हें आखिरी विदाई में देख सके इसलिए उनका पार्थिव शरीर उनके सरकारी आवास 5 जनपथ नई दिल्ली में रखा गया। उनकी विदाई 1 दिसम्बर 2012 को शाम 3 बजे “स्मृति स्थल” पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ की गयी।

 

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उनकी हस्ती हमारे लिए प्रेरणा दायक है भले आज वो हमारे बीच नहीं है पर उनके द्वारा किया गया कार्य उनके पदचिन्ह हमारे बीच हमेशा जीवित है । हमारे देश में महान नायक, जन नायक जन्म लिए है जिनकी जीवनगाथा हमारे लिए मोटिवेशन का काम करती है  ऐसे महान दिग्गजों को मेरा “शत शत नमन“।

 

इन्द्र कुमार गुजराल

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