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8 अप्रैल शहीदों के साहस की कुछ सुनी – अनसुनी कहानी

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8 अप्रैल शहीदों के साहस की कुछ सुनी – अनसुनी कहानी

 

8 अप्रैल शहीदों के साहस की कुछ सुनी - अनसुनी कहानी
Pic Source Google

आइये जाने 8 के दिन के इतिहास को….

देश की आने वाली पीढ़ी आज़ाद , सुकून में साँस ले सके और  उनका भविष्य सुरक्षित हो इसलिए देश के नवजवानों ने अपने वर्तमान की आहुति दे दी। 8 अप्रैल के दिन इन्हीं को समर्पित है..।

मंगल पांडेय

1857 में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत की चिंगारी भड़काने वाले बैरकपुर रेजिडेंट में सिपाही मंगल पांडेय को 8 अप्रैल को फांसी  दे दी गयी थी। मंगल पांडेय उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नागवा नामक गाँव में 19 जुलाई 1827 को एक ब्राह्मण परिवार मे जन्म हुआ था । ब्राह्मण होने के बाद भी मंगल पांडेय 1849 में 22 वर्ष की आयु में ईस्ट इंडिया कंपनी में शामिल हो गये थे।।

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बंकिमचंद्र चटोपाध्याय

बंकिमचंद्र चटोपाध्याय बंगाल के प्रख्यात उपन्यासकार,कवि ,गद्यकार और पत्रकार तथा भारत के राष्ट्रीय  गीत वन्देमातरम के रचयिता का आज के ही दिन 1894 में निधन हो गया था । इसके द्वारा लिखा गया राष्ट्रगीत स्वतंत्रता संग्राम काल में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्तोत्र बन गया था। रवीन्द्रनाथ ठाकुर के पुर्वर्ती बंगला साहित्यकार में उनका अप्रतिम स्थान था ।

भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त

1929 में क्रांतिकारी भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली असेम्बली हाल में बम फेका और गिरफ्तारी भी दी। उनके खिलाफ मुकदमा भी चला 6 जून 1929 को दिल्ली के सेशन जज लियोनार्डो मिडिलटन की अदालत में दिया गया । भगत सिंह का ऐतिहासिक बयान जिसमें उन्होंने अपनी बात को रखा अपनी बात कहीं और अंत में इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ अपनी वाणी को विराम दिया।

ये था आज का इतिहास

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