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बॉलिवुड ऐक्टर इरफान खान इस दुनिया में नहीं रहे

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बॉलिवुड ऐक्टर Irfan Khan इस दुनिया में नहीं रहे

 

Radha Singh | 29-04-2020

 

Irfan Khan

 

  • 54 साल के इरफान को इससे पहले न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर हुआ था।
  • इरफान खान की हाल ही में अंग्रेजी मीडियम फिल्म रिलीज हुई थी।

 

Irfan Khan भारतीय फिल्‍म अभिनेता थे। और वे बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय के लिए जाने जाते थे। वे बॉलीवुड के टैलेंटेड अभिनाताओं में शामिल थे।  यूं अचानक चले जाने से उनके फैंस और बॉलीवुड सेलेब्स सदमे में हैं। दो साल पहले मार्च 2018 में Irfan khan को न्यूरो इंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी का पता चला था। विदेश में इस बीमारी का इलाज कराकर इरफान खान ठीक हो गए थे। भारत लौटने के बाद इरफान खान ने अंग्रेजी मीडियम में काम किया था।  करीबी बताते हैं, ‘फिल्म अंग्रेजी मीडियम की शूटिंग के दौरान इरफान खान को एक कीमो थैरपी करवानी थी, लेकिन शूटिंग के चलते उनका वह ट्रीटमेंट स्किप हो गया।

 

 

इस वजह से फिल्म की शूटिंग के दौरान भी कई बार उन्हें तकलीफ होती थी,लेकिन बाहरी तौर पर उनकी परेशानी नहीं दिखाई दे रही थी। 2 महीने पहले यानी होली के पहले उनकी तबियत फिर से बिगड़ गई थी, बस उसके बाद लगातार उनकी तबियत बिगड़ती गई। अभी 10 दिन पहले जब उनकी परेशानी और ज्यादा बढ़ गई, तब उन्हें कोकिलाबेन में ऐडमिट करवा दिया गया। इस बार हॉस्पिटल में वह अपनी बीमारी से बहुत संघर्ष कर रहे थे।’ किसे पता था ये मूवी इरफान की जिंदगी की आखिरी फिल्म साबित होगी।

 

इरफ़ान का इतिहास

 

साहबजादा इरफ़ान अली ख़ान का जन्म  7 जनवरी 1967 में जयपुर में हुआ था।  इरफान के पिता यासीन और मां का नाम सईदा बेगम था।  जयपुर में इरफान के करीबी बताते हैं कि उनको बचपन से ही एक्टिंग का शौक था. साथ ही इरफान को पतंगबाजी में भी काफी दिलचस्पी थी। उनका मन क्रिकेट खेलने में भी लगता था।  इरफ़ान के पिता बिजनेस मैन थे और वो चाहते थे की उनका बेटा भी बिजनेस में आ जाये लेकिन इरफ़ान को बचपन से एक्टिंग का शौख था। उन पर एक्टिंग का जूनून सा सवार था। उन्होंने जयपुर से अपने करियर की शुरुआत की, उनके करियर की शुरूआत टेलीविजन सीरियल्‍स से हुई थी। अपने शुरूआती दिनों में वे चाणक्‍य, भारत एक खोज, चंद्रकांता जैसे धारावाहिकों में दिखाई दिए।   उनके फिल्‍मी करियर की शुरूआत फिल्‍म ‘सलाम बाम्‍बे’ से एक छोटे से रोल के साथ हुई . 

 

 

 

इरफान खान ने अपनी अदाकारी से सबका मन जीता, उन्होंने फिल्म जगत में एक अलग ही पहचान बनाई। उनकी कई फिल्में समाजसुधारक के साथ ही मनोरंजन का पिटारा थी। फिर वो पान सिंह तोमर हो या हिंदी मीडियम। कारवां, लाइफ ऑफ पाई, दी लंचबॉक्स,ब्लैकमेल, पीकू, स्लमडॉग मिलेनियर, मदारी जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था। उनकी अंतिम फिल्म “अंग्रेजी मीडियम” कोरोना काल के चलते बड़े परदे पर पूरी तरह से नहीं लग पाई लेकिन फिर भी उनका कार्य उसमें भी काफी प्रशंसनीय था। उनकी अंतिम फिल्म ‘अंग्रेजी मीडियम’ के कुछ दृश्य हम आपके साथ साझा करते हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर फिल्म फेयर अवॉर्ड

 

उन्‍हें तीन बार फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार और सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के तौर पर फिल्‍म ‘पान सिंह तोमर’ के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार भी मिल चुका है। उन्‍हें पद्मश्री सम्‍मान से भी नवाजा जा चुका है। दर्शक ऐसा मानते हैं कि वे अपनी आंखों से ही पूरा अभिनय कर देते थे और यही उनकी विशेषता भी थी। वे लीक से हटकर फिल्‍में करने की वजह से मशहूर थे।

 

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