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चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था राम भरोसे

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शाहगंज(जौनपुर)। अगर आपको दस मिनट के रास्ते को तय करने में घण्टो लग जाये, जब आपके कानों में बेतहासा वाहनों के हॉर्न की गूंज सुनाई दे और पैदल रेंग रेंग कर चलना पड़े तो समझिए आप जौनपुर जनपद के सबसे बड़े तहसील, पूर्वांचल के सबसे बड़े व्यपारिक केंद्र शाहगंज में हैं।

सरकारें आई और चली गई मगर स्थिति जस की तस बनी रह गई। अदद बाई पास के वादे भी हुए मगर यह सिर्फ कागजों की सोभा बन के रह गए। अब तो नगरवासियों के लिए मानो यह जाम उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा हो गया हो।

सालों से जाम से निपटने के लिए नगर वासियों ने न जाने कितनी बार जन प्रतिनिधियों से गुहार लगाई ,संघर्ष किया मगर उसका परिणाम शून्य रहा। आज हालात ऐसे है कि नगर या बाहर के लोगो का नगर के अंदर से गुजरना हो तो सौ बार सोचना पड़ता है और खुदा न खास्ता अगर नगर में घुस भी गए तो बाहर निकालने के लिए घण्टो ज़द्दोजहद करनी पड़ती है।

अगर कोई मरीज एमरजेंसी में हो उसका जीवन समझिए राम भरोसे। वैसे देखा जाय तो नगर में जाम का दो मुख्य कारण समझ में आता है पहला घनघोर अतिक्रमण दूसरा नगर में भारी वाहनों का प्रवेश जिसपर पुलिस प्रशासन ने शायद ही कभी ध्यान दिया हो जिससे लोगों के जीवन के साथ साथ व्यापार पर भारी प्रभाव पड़ता दिखाई देता है। अब इस जाम के झमेले को और कितना झेलना पड़ेगा इसका जवाब प्रशासन के पास से भी मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।

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