बकरीद में कुर्बानी के नाम पर अल्लाह से धोखाधड़ी…

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राधा सिंह | 26/07/2020

मुस्लिम बिरादरी में बकरीद के त्योहार का खास महत्व है। कहा जाता है कि बकरों की कुर्बानी से अल्लाह खुश होते हैं। लिहाजा मुस्लिम इस त्योहार में अपनी औकात के मुताबिक बकरे खरीद कर काटते हैं और उन बकरों का गोश्त खाने के साथ-साथ गरीबों में भी बांटते हैं। बकरीद आने वाली है।

ऐसे में मुस्लिम समुदाय के लोग खुदा को खुश करने के लिए बकरों की खरीद में लगे हुए हैं। इसी समुदाय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस त्योहार पर भी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आते।

ऐसे लोग अल्लाह के साथ भी धोखाधड़ी करने से नहीं चूक रहे। इसी बीच गाजियाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें कुछ मुस्लिम युवक बकरा मंडी में जाकर विक्रेताओं को ठगने में जुटे थे।

बता दें कि दिल्ली के गाजीपुर बकरा मंडी में दो युवकों ने कुर्बानी के लिए एक बकरा 60 हजार रुपये में खरीदा। अचानक वहां दो युवक आए और बकरे की तारीफ करके उसके दांत देखने लगे। उनमें से एक ने बकरे के मुंह में चुपचाप एक गोली रख दी। इससे बकरा बेहोश हो गया। दोनों युवक बकरे को बीमार बताकर उसे कम कीमत पर बेचने के लिए उकसाने लगे।

क्योंकि कहा जाता है कि बीमार और ऐबदार बकरों की बलि अल्लाह कुबूल नहीं करता है। इसी बात का फायदा उठाकर ये युवक विक्रेता को तगड़ा चूना लगाने में लगाना चाहते थे।

शक हुआ तो बकरे के मालिक शाहिद ने उसका मुंह चेक किया। इसमें रखी गोली निकालकर उसने सूंघी तो वह भी बेहोश होकर जमीन पर गिर गया।

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शाहिद के भाई ने शोर मचाया और गाजियाबाद के रहने वाले वसीम नाम के एक युवक को दबोच लिया। बेहोश शाहिद को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उधर, बेहोश हुआ बकरा कुछ ही देर में ठीक होकर खड़ा हो गया।

 

पूर्वी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गाजियाबाद की संजय कॉलोनी निवासी यूनुस अपने भाई शाहिद के साथ कुर्बानी के लिए बकरा लेने गाजीपुर मंडी आया था। यहां इन्होंने एक बकरा पसंद किया और 60 हजार रुपये में खरीद लिया।

इसी दौरान गाजियाबाद निवासी बदमाश वसीम अपने साथी कामिल के साथ वहां पहुंचा और दांत देखने के बहाने बकरे के मुंह में गोली रख दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने वसीम को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में उसने बताया कि वे महंगे बकरों को इसी तरह देखने के बहाने गोली खिलाकर बेहोश कर देते थे। बाद में बकरों का मालिक डर की वजह से इन्हें सस्ते में बेच देता था। थोड़ी देर में बकरा एकदम ठीक हो जाता था, इसके बाद जब वह उस बकरे को बेचता तो उसे अच्छे दम मिल जाते थे।

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