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27 अप्रैल का इतिहास जब बाबर बना था दिल्ली का सुल्तान

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27 अप्रैल का इतिहास जब बाबर बना था दिल्ली का सुल्तान

 

Saumya Tiwari | 27-04-2020

27 अप्रैल
Photo Source Aajtak

जीवन परिचय –

 

आपने भी कभी ना कभी हिन्दू मुस्लिम का किस्सा सुना होगा और देखा होगा । क्यूं ना सुना होगा ! क्या अयोध्या और बाबरी मस्जिद का नाम नहीं सुना ?
अरे भाई बिल्कुल सुना होगा , कितने वर्षों से यही तो हमारे राजनीति और समाज में था । खैर छोड़िए इन सब बातों को । क्या आप बाबर के विषय में जानते हैं ? नहीं ! तो फिर हमारे जर्नलिस्ट सौम्या तिवारी की ये रिपोर्ट पेश है आपके लिए …!

 

26 अप्रैल को किस महान गणितज्ञ का निधन हो गया था

 

दरअसल बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को अन्दिजान में हुआ था जो कि फिलहाल उज्बेकिस्तान का हिस्सा है। बाबर का पूरा नाम जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर था, जिन्हें हम केवल बाबर के नाम से भी जानते है । बाबर की उम्र जब 12 साल थी तो उनके पिता शेख मिर्ज़ा के अचानक मृत्यु के बाद बाबर को काम संभालना पड़ा । बाबर के माता का नाम कुलगुर निगार खानम और इनके पिता की मुख्य 11 बेगम व 20 बच्चे थे । बाबर का पहला बेटा हुमायूँ था, जिसे उसने अपना उत्तराधिकारी बनाया था । बाबर की मृत्यु आगरा (भारत) 26 दिसंबर सन 1530 में हुई थी ।

बाबर द्वारा लड़ी गई कुछ प्रमुख लड़ाईयां

 

1. पानीपत की लड़ाई .

 

एक तैमूरवंशी होने के कारण बाबर को लगता था दिल्ली पर तैमूरों का ही शाशन होना चाहिए। जिसकी वजह से बाबर ने मेवार के राजा इब्राहिम लोदी पर छोटे छोटे आक्रमण करना शुरू कर दिया था, और ऐसे में उन दोनों के बीच युद्ध छिड़ गई । 15 अप्रैल 1526 को बाबर ने लोधी को हराकर पानीपत की लड़ाई जीत लिया । इसके बाद बाबर ने भारत में अपने साम्राज्य फैलाने की सोची । पानीपत के इस युद्ध को जीतने के बाद बाबर का दिल्ली की सत्ता पर अधिकार हो गया । उसकी इस जीत ने भारतीय राजनीति को पूरी तरह से बदल के रख दिया ।

 

बाबर की मृत्यु

 

बाबर की मृत्यु 26 दिसंबर 1530 को हुई थी । अपनी मृत्यु से पहले बाबर ने पंजाब , दिल्ली , बिहार पर जीत हासिल कर ली थी । कहा जाता है की बाबर अपने पहले बेटे हुमायूँ को बहुत मानते थे । हुमायूँ जब 22 वर्ष का था उस वक़्त हुमायूँ को किसी भयानक बीमारी की चपेट में था । तब बाबर अपने उत्तराधिकारी को खोना नही चाहते थे, ऐसा कहा जाता है कि बाबर ने अल्लाह से खुद को बीमार करने और हुमायूँ को ठीक करने की दुआ मांगी । इसके बाद बाबर का स्वास्थ्य बिगड़ गया और 1530 में जब हुमायूँ पूरी तरह से ठीक हुए तो बाबर की मौत हो गयी।

 

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