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जानिए आज इस महान व्यक्ति की हुई थी मृत्यु ?

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जानिए आज इस महान व्यक्ति की हुई थी मृत्यु  ? 

Saumya Tiwari

एक विश्व प्रसिद्ध सैद्धान्तिक भौतिकविद् जिन्हें किसी परिचय की आवयश्कता नहीं। ये वह विधाता है जिन्हे सापेक्षता का सिद्धांत और द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण E=mc^2 के लिए जाना जाता है। आइंस्टीन पढ़ने में आम बच्चो की तरह बिल्कुल नही थे। यह बेहद कमजोर थे इन्हें मूर्ख बच्चों की श्रेणी में रखा जाता था। इन्हें इनके अध्यापक पसन्द नही करते थे।

 

जानिए आज इस महान व्यक्ति की हुई थी मृत्यु? |आइंस्टीन
Photo Source Google

यह यहूदी परिवार से थे इनके पिता एक इंजीनियर व सेल्समैन थे। जर्मनी में रहने से इन्हें ज्यादा भाषा का ज्ञान नही था यह बस जर्मन बोलते थे बाद में इन्होंने इतालवी और अंग्रेजी सीखी। सन् 1880 की बात है जब इनके पिता ने म्यूनिख जाने का फ़ैसला किया जहां उनके पिता और चाचा ने मिलकर कंपनी स्थापित करने के लिए सोचा, जिसका मुख्य कार्य बिजली के उपकरण बनाना था।

 

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इनका परिवार यहूदी होने के बावजूद यहूदी परम्परा और धर्म को नही मानता था। इसी वजह से आइंस्टीन को कैथोलिक विद्यालय में पढ़ने का मौका मिला। इनकी माँ को सारंगी बजाना पसन्द था पर आइंस्टीन का मन नही लगता था फिर भी इन्होंने सीखा और कुछ दिन बाद छोड़ दिया लेकिन अंततः सारंग संगीत को आइंस्टीन पसन्द करने लगे।

 

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उनके पिता की कंपनी को 1894 में नुकसान भुगतना पड़ा और अपनी कंपनी भी बेचनी पड़ी । व्यापार की तलाश में आइंस्टीन परिवार इटली चला फिर मिलान शहर और वहां से कुछ महीने बाद पाविया शहर बस गए। आइंस्टीन म्यूनिख में ही रुके अपनी पढ़ाई पूरी करने हेतू, दिसंबर 1894 के अंत मे जब उन्होंने पाविया में अपने परिवार से मिलने इटली यात्रा की तब उस दैरान उन्होंने एक चुम्बकीय क्षेत्र में ईथर की अवस्था की जांच शीर्षक एक लघु निबंध लिखा।

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आइंस्टीन ने अपने पूरे जीवनकाल में सैकड़ो किताबे और लेख प्रकाशित किये । इन्होंने 300 से अधिक वैज्ञानिक ,150 गैर वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किये । 1965 में अपने व्यख्यान में ओपेनहाइमर ने उल्लेख किया कि जब आइंस्टीन के प्रारंभिक लेखक आते थे तो कई त्रुटिया होती थी, जिसको सही करने में 10वर्ष का समय लग जाता था । सोचने कि बात तो यह है कि एक आदमी जिसकी गलतियों को सही करने के लिए 10 वर्ष का समय लग जाता था ।

 

जानिए आज इस महान व्यक्ति की हुई थी मृत्यु? |आइंस्टीन
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आइंस्टीन एक भावुक प्रतिबद्ध जातिवाद के विरोधी व्यक्ति थे और प्रिंटन में नेशनल एसोसिएशन ऑफ एडवांसमेंट अगफ वर्ल्ड पीपल संस्था के सदस्य भी थे। 14 जुलाई 1930 को बर्लिन में आइंसटीन की मुलाकात भारत के महान साहित्यकार रहस्यवीद व नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर से हुई। पश्चिम की तार्किक विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर ने वाले अपने समय के महान वैज्ञानिक और पूर्व विचारण एवं भक्त कवि की इस मुकालात के बाद उनके बीच हुए संवाद को इतिहास की एक अनूठी विरासत माना जाता है।

 

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आईंस्टीन ने कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किये 1922 में उन्हें भौतिकी सैद्धान्तिक भौतिकी के लिए अपनी सेवाओं और विशेषकर प्रकाश विद्युत् प्रभाव की खोज़ के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया । 1921 में अल्फ़्रेड नोबेल द्वारा निर्धारित मापदंडों में कोई भी ख़रा नही उतरा तो पुरस्कार आगे बढ़ा के 1922 में आईंस्टीन को इससे सम्मानित किया गया।

 

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18 अप्रैल 1955 में 76 वर्ष की अवस्था मे इनकी उदर महाधमनी विस्फार के चलते मृत्यु हो गयी। इस बीमारी से शरीर में खून पहुंचाने वाली मुख्य नस जिसे महाधमनी कहते है वह पूरे पेट के आसपास फैल जाता है ,और उससे उदर महाधमनी के फटने के खतरा बढ़ जाता है यह मुखयतः बूढ़े और धूम्रपान का सेवन करने वाले को होता है। आईंस्टीन को यही बीमारी हुई थी जिससे उनकी मृत्यु हो गयी।

 

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