The ATI News
News Portal

बिजली महादेव मंदिर पर हर 12 साल में गिरती है बिजली! जानिये क्यों होता है ऐसा ??

0

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

हिमाचल प्रदेश की एक वीडियो सोशल मीडिआ पर तेजी से वायरल हो रही है। खबर है कि बिजली महादेव मंदिर पर तड़तड़ाते हुए बिजली गिरी, आप कहेंगे कि बिजली गिरना तो सामन्य है इसमें नया क्या है। तो बताते हैं उससे पहले बिजली महादेव मंदिर के पास गुरुवार को आकाशीय बिजली गिरने की घटना का ये अद्भुत दृश्य देख लीजिये, जो कैमरे में कैद हो गया. ये घटना गुरुवार शाम करीब 6 बजकर 54 मिनट पर कुल्लू जिले के बिजली महादेव मंदिर के ठीक ऊपर से आकाशीय बिजली यहां के जिया गांव के पीछे गिरी।

नितिन गडकरी की फिसली जुबान,बोले मुझे खुशी है कि ऑक्सीजन की कमी से लोगो को जान गवानी पड़ी

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि अचानक से चमचमाते हुए बिजली गिरी। इस मंदिर को लेकर जो कहानी है अब वो भी जान लीजिये, बता दें कि बिजली महादेव मंदिर को कुल्लू के एक प्रसिद्ध देवस्थल के रूप में जाना जाता है. सामान्य दिनों में यहां हर दिन सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं. इस मंदिर की आस्था लोगों में बहुत है।

इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि बिजली महादेव के मंदिर पर हर 12 साल में एक बार आकाशीय बिजली गिरती है. कहा जाता है कि आकाशीय बिजली शिवलिंग पर ही गिरती है और शिवलिंग कई हिस्सों में टूट जाता है लेकिन यह टूटा हुआ शिवलिंग कुछ दिनों बाद पुनः अपनी मूल अवस्था में लौट आता है. हालंकि हम इस बात की पुष्टि नहीं करते, पर जो घटना कैमरे में कैद हुई वो चमत्कार से कम नहीं है।

अमीन पठान ने क्यों कहा अदिति सिंह से नैतिकता के आधार पर आप भी दे सकती हैं इस्तीफा।

हिमालय की गोद में बसा हुआ यह बिजली महादेव का मंदिर हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी पर स्थित है। शिवलिंग पर बिजली गिरने के कारण ही इस मंदिर का नाम पड़ा बिजली महादेव पड़ा, यह मंदिर व्यास और पार्वती नदी के संगम पर स्थित एक पहाड़ पर बना हुआ है तथा समुद्र तल से 2450 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि इस क्षेत्र पर कभी कुलांतक नाम के एक दैत्य ने कब्जा कर लिया था, उसका शरीर विशाल अजगर की तरह था। और वो दैत्य पूरे क्षेत्र को पानी में डुबा देना चाहता था, इस उद्देश्य से उसने व्यास नदी के पानी को रोक दिया था, कहा जाता है कि पूरे क्षेत्र की रक्षा करने के लिए अंततः भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से कुलांतक का वध कर दिया, वध केबाद कुलांतक का विशाल शरीर एक पहाड़ में बदल गया और इस स्थान का नाम भी उसी दैत्य के नाम से अपभ्रंश के चलते कुल्लू हो गया।

गांव में विगत् वर्षों में खूब हुई है लूट , मैं जांच कराकर ही मानुंगा : मिथुन

 

पौराणिक कहानियों के अनुसार भगवान शिव ने ही इन्द्र देव को आदेश दिया था कि वह इस दैत्य की देह पर हर बारह वर्ष में आकाशीय बिजली गिराएँ, तब से ही हर 12 साल पर यहाँ आकाशीय बिजली गिरती है। लेकिन इस बिजली से किसी प्रकार का नुकसान न हो, इसलिए भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में यहाँ स्थापित हो गए और इन्द्र को अपने ऊपर ही बिजली गिराने के लिए आदेश दिया।

बिजली गिरने के बाद मंदिर का शिवलिंग कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है। मंदिर के पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को एकत्र करके मक्खन से उन्हें चिपकाते हैं। और यह चमत्कार ही है कि कुछ दिनों के बाद शिवलिंग अपने मूल ठोस स्वरूप में लौट आता है। ये कहानी मान्यताओं के आधार पर है।

पर ये गौर करने वाली बात है कि बिजली महादेव मंदिर पर बिजली गिरने की इस घटना के कारण कोई नुकसान नहीं हुआ। वहीं हिमाचल प्रदेश के कुछ और इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने के कारण कई पशुओं की मौत हो गई, कांगड़ा जिले के मनाई धार गांव में बिजली गिरने के कारण 300 बकरियों की मौत हो गई। वहीं के तियारा गांव में एक महिला बुरी तरह से झुलस गई, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 

तो कैसी लगी आपको ये कहानी कमेंट बॉक्स में जरूर बताए। अगर आपको इस मंदिर तक जाना है तो बता दें कि बिजली महादेव जिस पहाड़ी पर स्थित हैं, उसकी कुल्लू से दूरी लगभग 25 किमी है। कुल्लू से बिजली महादेव तक पहुँचने के लिए बस या टैक्सी उपलब्ध रहती हैं, ये बस या टैक्सी आपको चांसरी तक ले जाएगी जहाँ से 3 किमी की ऊँचाई तक सीढ़ी चढ़ने के बाद बिजली महादेव पहुँच सकते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.