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विकलांग महिला के सामने अपाहिज हुई पुलिस, मानवता को‌ कर दिया तार-तार

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उत्तर प्रदेश। मामला प्रदेश के कानपुर जिले का है जहाँ देश के रखवालों ने अपनी हरकत से इंसानियत को भी बुरी तरह से शर्मशार कर दिया है। पूरा मामला यह है कि जिले में रहने वाली एक दिव्यांग महिला ने पिछले दो महीने से अपनी नाबालिग बेटी के किसी रिश्तेदार द्वारा अपहरण कर लिए जाने की रिपोर्ट चकेरी थाने में दर्ज कराई थी। उसका कहना है कि वह इसी चक्कर में महीनों से पुलिस वालों के हाथ-पाँव जोड़ रही है कि वह जल्द से जल्द ही कार्रवाई शुरू कर दें। लेकिन देश में आम जनमानस की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस वालों की हरकत ने पूरे डिपार्टमेंट का सिर शर्म से झुका दिया।

दरअसल उन्होंने उस असहाय महिला से यह कहा कि पुलिस अपना काम तभी करेगी जब तुम गाड़ी में डीज़ल डालने के लिए पैसा दोगी‌।मजबूर महिला ने उनकी इस शर्त को भी मानना स्वीकार कर लिया मगर नतीजा फ़िर भी कुछ अच्छा नहीं मिला। क्योंकि पुलिस वालों ने इसे हर रोज़ का धंधा बना लिया। और महिला से बस पैसा चूसने का काम कर रहे हैं।

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पुलिस अधिकारियों के इस रवैए से तंग आकर पीड़ित महिला सोमवार सुबह कमिश्नर के पास पहुँची और दोनों पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कर मीडिया से भी रूबरू हुई। उसने बताया कि अपनी बेटी के लिए महीनों से वह दोनों पुलिस वालों के आगे हाथ जोड़ रही है लेकिन सिर्फ़ बेइज्जती ही हाथ लग रही है। हर रोज़ वह केवल यह कहकर बहका देते हैं कि आपका काम हो रहा है हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। और कभी-कभी तो वे थाने से डाँट फ़टकारकर महिला को भगा भी देते हैं।

फ़िर भी सब कुछ बर्दाश्त करने के‌ बावजूद भी वह उम्मीद लेकर हर दिन वहाँ आती है। महिला ने बताया कि वह इस बात से इंकार नहीं कर रही है कि उसने पुलिस अधिकारियों को एक भी रुपए रिश्वत के तौर पर नहीं दिया है मगर उन्होंने अपनी गाड़ी में डीज़ल डलवाने के लिए महिला को‌ मजबूर किया था‌‌।

पीड़िता ने बताया कि उसने अपने रिश्तेदारों से लगभग 10-15 हज़ार रुपए उधार लेकर उनकी गाड़ी में डीज़ल डलवाया मगर अब वह इस हालत में नहीं है कि वह उन्हें और पैसे दे सके‌‌। महिला के पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ दिए हुए बयान का यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने पीड़ित महिला को आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस मामले पर कार्रवाई की जाएगी और यदि पुलिस अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके ख़िलाफ़ शख़्त से शख़्त कार्यवाही भी की जाएगी।

पीड़िता का वीडियो वायरल होने‌ के बाद कानपुर पुलिस ने ट्वीट करते हुए बताया कि दोषी पुलिस चौकी इंचार्ज को हटा दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला की बेटी को ढूँढने के लिए चार टीमें बनाई गई हैं और अब की बार पुलिस अपना काम पूरी ईमानदारी से करेगी और जल्द ही पीड़िता की बेटी को भी खोज निकालेगी।

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