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तो ये है कोरोना से भी अधिक खतरनाक..??

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तो ये है कोरोना से भी अधिक खतरनाक..??

 

भारत में किसी को कोरोना हुआ है या नहीं है लेकिन मानसिक बीमारियों की एक बाढ़ आ गई है।  भारत के हर व्यक्ति में भय ,तनाव ,चिंता और अवसाद बढ़ गया है , जो कि बेहद खतरनाक हो सकता है। हर व्यक्ति के मन में एक अजीब डर है कि उसे भी तो कोरोना नहीं हो गया है? ऐसे में ATI टीम इस के बारे में कुछ व्यक्तियों से फोन पर बात की,और उनसे लॉकडाउन के बारे में पूछा तो सबने यही कहा की मन में चिंता बहुत है , डर है और लॉकडाउन से डिप्रेशन भी हो रहा है।

 

तो ये है कोरोना से भी अधिक खतरनाक..??
Image Source Google

कोरोना और उसके वजह से हुए लॉकडाउन से कुछ नुकसान है जो सीधे तौर पर नज़र नहीं आ रहा है । ऐसे में ये छुपे हुए हैं मगर बहुत ख़तरनाक हैं और उनपे नज़र रखनी हैं। लॉक डाउन के दौरान में कुछ लोग अपने घरों से दूर हैं और कुछ कोरोना पोस्टिव ना होते हुए भी खुद को वैसा ही महसूस करने लगे हैं जिससे कि कईयों को ब्लड प्रेसर की शिकायत भी आने लगी। हालांकि हर किसी को ऐसा नहीं हो रहा मगर कही ना कहीं लॉक डाउन होने से लोग डिप्रेस्ड हो रहे हैं ।

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जाने अनजाने में यह डर बना हुआ है लोगों में ,कोरोना से हुआ लॉक डाउन जो लोगो के दिमाग में घूम रहा हैं,देश में लॉक डाउन से लोगों के ऑफिस, स्कूल, मॉल,कॉलेज, यूनिवर्सिटी सब कुछ बन्द,मजदूर अपने कामों पे नहीं जा रहें हैं। लोगों की सोशल एक्टिविटी बन्द हो गयी ,हम सब ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जो कभी सोचा नहीं गया था। घरों से बाहर निकलना अब बीमारी ला रहीं हैं, जो लोग रोज कमाते हैं उन्हें दिक्कते हो रहीं हैं इसे हज़ारों लोगों ने पलायन भी कर लिया।

दुनिया भर के मेन्टल हेल्थ एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं, जो ग्लोबल हेल्थ Covid-19 से दुनिया भर में लॉक डाउन की वजह से मेन्टल हेल्थ में बहुत नेगेटिव असर पड़ रहा हैं। जिसे इण्डियन साईक्रेटिक्स सोसायटी ने इसपे सर्वे किया है कि डिप्रेसन के मामले में 20% की बढ़ोत्तरी हुई हैं और करोड़ों भारतीय मेन्टल हेल्थ से किसी न किसी प्रकार से जूझ रहें हैं। हम दुनिया को कंट्रोल नहीं कर सकते मगर कुछ चीज़ें हैं जो खुद से कंट्रोल किया जा सकता हैं, दुनिया भर के साइकोलॉजिकलो और डॉक्टरों का मानना हैं, कुछ बेसिक बाते जो डिप्रेसन को कम करेंगी।

पूरी नींद ले।

नींद के साथ समझौता ना करें, देर रात तक सोशल मीडिया पर एक्टिव ना रहे । जल्दी ही सोने की कोशिश करें, यदि हम पूरी नींद सोते हैं अच्छी नींद लेंगे तो हम स्वस्थ रहेंगे। इससे हमारा डिप्रेसन कम होगा।

जानकारी रखें, पर हर टीवी और खबरें ना पढ़े

बार-बार कोरोना की जानकारी लेने तरह तरह की वेबसाईट पर ना जाये। देश दुनिया की खबरें देखे बस दिन में एक या दो बार ,इसके द्वारा महामारी के अफ़वाहों से बचें। कोरोना वायरस की जानकारी लेना जरुरी है मगर कोरोना से सम्बंधित थोड़ी ही जानकारी ले,क्योंकि ज्यादा कोरोना के खबरें देखने से पैनिक अटैक भी हो सकता हैं। ज्यादा घरों के काम मे व्यस्त रहे, बुक्स पढ़े, जहाँ हो सकें टेलीफोन पे दोस्तों से बात कर ले वो भी कोरोना से सम्बंधित नहीं।

पुरानी बाते और बीते साथ की जो आपको तनाव से दूर रखेंगी, और मनोविज्ञानिको की सबसे जरूरी सलाह की दफ़्तर या कॉलेज नहीं जाना तो फिर भी अपने निर्धारित समय पर ही उठे और घरों में ही एक्टिविटी और किसी भी प्रकार का मूवमेंट करते रहें, व्यायाम करें, पूरे तरीक़े से धूप में ना बैठे, घरों के उस कोने में जाये जहाँ थोड़ी धूप हो वहाँ बैठे कुछ समय।

ATI न्यूज़ चैनल आपसे गुजारिश करती हैं आप डिप्रेस्ड मत होइए, जहाँ हैं खुद को सुरक्षित रखिये और स्वस्थ रहिये। क्योंकि पूरी दुनिया इससे जूझ रहीं है। अकेले नहीं हैं,इसे जरूर याद रखें और जो अपने घरों से दूर हैं या घरों में हैं जहाँ भी है सुरक्षित हैं कृपया डिप्रेस्ड ना हों क्योंकि यह कोरोना से भी ज्यादा ख़तरनाक हैं।

Anjali pandey

(Sub editor ) theatinews.com

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