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वह पत्रकार जो बबिता फोगाट , खिलाड़ियों और देश के सेनानियों का बना रहा मज़ाक !

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वह पत्रकार जो बबिता फोगाट , खिलाड़ियों और देश के सेनानियों का बना रहा मज़ाक !

Rana Singh

 

वह पत्रकार जो बबिता फोगाट , खिलाड़ियों और देश के सेनानियों का बना रहा मज़ाक !#प्रशांत कन्नौजिया
प्रशांत कन्नौजिया
  • संतों को मारो और जमातियों को पूजो–
  • एक नेता अगर धर्म और जातिसूचक शब्द बोलता है तो समझ में भी आता है लेकिन पत्रकार अगर यह कार्य करता है तो ये निंदनीय है

आपको बता दें कि भारत में मरकज जमाती मामले के बाद अचानक से कोरोना मरीजों में भरमार आ गई, जिससे क्षुब्ध होकर भारतीय महिला पहलवान व भाजपा नेता बबिता फोगाट ने एक निंदनीय पोस्ट ट्विट कर दिया था कि भारत में कोरोना महामारी से भी ज़्यादा खतरनाक जमाती हैं। जिस बात पर बबिता को ट्रोल किया जाने लगा है । ट्रोल करने में एक प्रशांत कन्नौजिया नाम के पत्रकार का नाम सबसे ऊपर दिखाई दे रहा है , जो अपने ट्विटर से लगातार देश की गरिमा बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को अपमानजनक शब्दों से नवाजे जा रहा है। 

 

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धर्म और जाति के दंगे तक भड़का देने वाले शब्दों, भाषाओं का लगातार प्रयोग कर रहा है , खुलेआम अपने ट्विटर एकाउंट पर हिंदू मुस्लिम जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआत इसने तब से की जब बबिता की एक पोस्ट पर इन्होंने लिखा की एक मुस्लिम ने फ़िल्म बनाकर तुम्हें चर्चित कर दिया नहीं तो तुम जैसे खिलाड़ी गोलगप्पे बेचते हुए सड़कों पर मिलते ।

 

इस पोस्ट से भारत के खेल जगत और खिलाड़ियों का अपमान हुआ है

इसके इस पोस्ट पर बजरंग पूनिया व योगेश्वर दत्त ने जवाब में लिखा कि खिलाड़ी गोलगप्पे बेचकर मेहनत की कमाते हैं, फिल्म की कमाई किसने खाई। और बबिता ने ज़िदंगी में कुछ किया तो फ़िल्म बनी उन पर , तुम अपने ऊपर भी एक फ़िल्म बनवा कर दिखाओ।

 

 

पत्रकार ने गाली दी वीर सावरकर को–

इतना सुनते ही स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया ने अपना आपा खोकर देश के शहीदों और स्वतंत्रता सेनानीयों पर भी छींटाकसी करते हुए लिखा कि फ़िल्म तो अंग्रेज़ों के दलाल माफीवीर सावरकर पर भी बनी थी, तो क्या उसने कोई तीर मारा था ?

यह ट्विट प्रशांत की बेहद शर्मनाक हरकत है, एक पत्रकार के ही शब्द जब ऐसे होंगे तो पत्रकारिता का क्या स्तर समझा जाएगा?

 

कौन है प्रशांत कन्नौजिया  ?

आपको बता दें कि प्रशांत कन्नौजिया मुम्बई का रहने वाला है.  IIMC व मुम्बई यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढा़ई की, पूर्व में “द वायर हिंदी व इंडियन एक्सप्रेस” से काम भी कर चुका है।

 

जब योगी आदित्यनाथ के लिए किया था अपमानजनक ट्विट–

पहली बार 6 जून 2019 को चर्चा में आए प्रशांत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए बेहद अपमान जनक शब्दों का इस्तेमाल किया था जिसकी केस लखनऊ के हज़रतगंज थाने में एक S.I  ने लिखवाई थी और उसके तहत् प्रशांत को दिल्ली से 8 जून को गिरफ्तार भी कर लिया गया था , जिसे बाद में 11 जून को सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कार्य दोबारा ना करने की हिदायत देकर बेल पर बरी कर दिया था ।

बी बी सी की रिपोर्ट : प्रशांत कनौजिया मामले में कौन सही कौन ग़लत

 

आर्मी चीफ़ की तुलना कर दी जनरल डायर से–

बेल मिलने के कुछ ही महीने बाद यानी 10 अगस्त 2019 को प्रशांत ने अपने स्वतंत्र पत्रकार होने का दुरुपयोग करते हुए भारत के आर्मी के मुख़िया की तुलना लाखों निर्दोषों के हत्यारे जनरल डायर से कर दी थी। जब इस पर लोगों ने ट्रोल किया और ख़ुद कुमार विश्वास ने ट्विट को लेकर लोगों को टैग करके ऐसी मानसिकता की अवहेलना की तो ये महोदय झट से अपनी ट्विट डिलीट कर दिए और दूसरी ट्विट करके लोगों से इस कृत्य पर माँफी भी माँगी।

कुमार विश्वास की ट्विट–

 

 

यही नहीं, जब प्रशांत की पुरानी पोस्ट / ट्विट को खंगाला गया तो उसमें एक पोस्ट मिली 3 सितम्बर 2016 की, जिसमें उसने साफ़ शब्दों में लिखा है कि ” संतों की हत्या करो और इंसानियत को बचाओ।”

समय समय पर ये देश , प्रधानमंत्री व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पर बेहूदा कमेंट स्वतंत्र पत्रकारिता के चादर तले करता रहता है । इसकी मानसिकता और कृत्य को देखकर ऐसा तनिक भी नहीं लगता है कि इसने पत्रकार धर्म/ कर्तव्य का पालन किया है , यह पत्रकार का चोला पहनकर ओछी राजनीति करने वाला एक तुच्छ व्यक्ति मात्र है।

 

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