The ATI News
News Portal

विकास के पहले मर्डर से अब तक के उसके ‘ विकास ‘का सफर ,आखिर कब और कैसे की पहली हत्या ।

1

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

विकास के पहले मर्डर से अब तक के उसके ‘ विकास ‘का सफर ,आखिर कब और कैसे की पहली हत्या ।

 

दिव्यांशु सिंह -एडिटर की कलम से । 05/07/2020

 

कानपुर पुलिस हत्याकांड:एनकाउंटर के डर से सरेंडर कर सकता है कुख्यात विकाश दुबे

Photo Google

 

न्यूज़ पेपर से लेकर मीडिया रिपोर्ट तक रोज कहीं ना कहीं किसी न किसी व्यक्ति की मौत की खबर छपते रहते हैं और दिखाते रहते हैं । किसी का मौत उजाले में दिख जाता है तो किसी का महज अंधकार की एक चिंगारी बनकर बुझ जाती है । लेकिन यही चिंगारी आग लगने के बाद गीनी जाती है । आज विकास दुबे यूपी का वो” विकास ” बन गया है जिसने राजनीति से लेकर पुलिस के वर्दी तक पर खून का निशान लगा दिया है । 

 

 

राजनीति तो मानो आज केवल अमीरों और हत्यारों की पोटली बन गई है जो केवल मौत और वोट के लिए ही खुलती हैं ।आखिर विकास दुबे इतने मौत के अंकों में ‘ विकास ‘ कैसे करता गया है ? क्या कानून और राजनीति केवल गरीबों के घर पर ही चलाई जा सकती है । आखिर अब तक हत्यारे विकास कों इतने बड़े विकास करने का मौका ही क्यूं दिया गया ? यूपी पुलिस के जिन बहादुर जवानों की मौत हुई उसका जिम्मेदार इन नेताओं और स्वयं पुलिस को ना माना जाय तो आखिर किसे कहा जाय । वैसे राजनीति ने कहीं ना कहीं बहुत हत्यारों को शरण दे रखी है वह चाहे प्रत्यक्ष रूप में हों अथवा अप्रत्यक्ष रूप में ।

 

 

मौत के हर खबर के बाद एक खबर आना लाजमी होता है ,वो है किसी राजनीतिक पार्टी के किसी नेता का बयान जो या तो सरकार पर होता है या फिर किसी सांसद विधायक पर । कटाक्ष करने में यह राजनीतिक पार्टियां पीछे नहीं हटती और लोगों को आश्वस्त करने की जगह लोगों को आग बबूला होने पर मजबूर कर देती हैं । कुछ ऐसा ही विकास दुबे के कांड में भी हुआ ।

एक तरफ पुलिस के आठ बहादुर जवानों की हत्या हुई तो वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और फिर क्या हर बार की तरह कटाक्ष शुरू कर दिया । जनाब से यह प्रश्न लाजमी है कि आपके पार्टी के साथ भी इस हत्यारे के तार जुड़े हुए हैं तो क्यूं ना पुलिस कि कुछ मदद ही कर देते। क्या सत्ता में आप न थे । जेल में रहते हुए भी वह जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत जा रहा है ,क्याथ की दक्षिणी भारत की फिल्म है ।

 

 

वहीं दूसरी तरफ दुनिया का सबसे स्वच्छ छवि दिखाने वाली बीजेपी भी अपनी तरफ से कुछ भी बोलने के बजाय चुप्पी साध ली । एक्शन में माहिर माने जाने वाले सीएम योगी भी इस विकास के आगे फेल ही नजर आते दिख रहे हैं । देश विरोधी मुद्दे पर हमेशा बनी रहने वाली कांग्रेस का कुछ कहना ही नहीं । कांग्रेस सांसद रह चुके राजाराम पाल के साथ भी हत्यारे विकास दुबे की फोटो अब तेजी से वायरल हो रही है । ऐसे में इनसे भी सवाल लाजमी है कि आखिर इस हत्यारे का कांग्रेस नेता के साथ क्या रिश्ता है ? जबकि यह पहले से ही मुजरिम रहा है ।

 

विकास दुबे के मौत करने का कारवां कुछ यूं शुरू हुआ ,,,

विकास दुबे ने साल 2000 में ताराचंद्र इंटर कॉलेज की जमीन पर कब्जा करके उस पर मार्केट बनाने की लिए प्रिंसपल सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या कर दी । इसमें उसको उम्रकैद हुई लेकिन बाद में जमानत पर बाहर आ गया ।इसके बाद साल 2001 में विकास दुबे ने शिवली थाने में अंदर घुस कर यूपी के दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला को गोलियों से भून डाला । इसी तरह धीरे-धीरे वो अपनी हिस्ट्री में एक से एक मौत लिखता गया और राजनीतिक संरक्षण पाकर बचता भी गया ।

 

 

आखिर कैसे हुई भगवान जगन्नाथ की सुप्रीम जीत

 

 

इस घटना को याद करते हुए बीएसी नेता अनुभव चक का कहना है कि संतोष शुक्ला के विरोधी गुट के जिसमें बीजेपी के भी लोग शामिल थे, वो विकास दुबे को संरक्षण देते हैं और वह बीजेपी की सरकार होते हुए भी राज्य छोड़कर भाग जाता है और किसी दूसरी जगह पनाह ले लेता है ।  ऐसे में खुद को इस घटना से अलग करने में लगी हुई बीएसपी से यह सवाल बनता है कि जब इतना कुछ पता था तो अपनी सरकार बनने के बाद आखिर क्यों विकास दुबे को विकास करने के लिए छोड़ दिया था।

इसके साथ ही यूपी पुलिस के वो अधिकारी और वह इंस्पेक्टर साथ ही इन्हीं सवालों के घेरे में हैं जिन्होंने अपने विभाग की गोपनीय जानकारियां किसी क्रिमिनल को देना मुनासिब समझा । क्या यह सब महज पैसे का लालच है या फिर कोई और कारण। 

 

फिलहाल इन्हीं सब सवालों के साथ लेते हैं आपसे विदा फिर मिलते हैं किसी और संपादकीय पृष्ठ के साथ ।

1 Comment
  1. […] विकास के पहले मर्डर से अब तक के उसके ‘ व… […]

Leave A Reply

Your email address will not be published.