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क्या घूस लेने वालों में नंबर वन है यूपी पुलिस ?

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क्या घूस लेने वालों में नंबर वन है यूपी पुलिस ?क्या घूस लेने वालों में नंबर वन है यूपी पुलिस ?

जिले में संगठित अपराधों से अवैध वसूली का पुलिसिया खेल बहुत पुराना है। कोतवाली और थानों में पुलिस की वसूली के लिए कारखास सिपाहियों की ड्यूटी लगाई जाती हैl जो अवैध धंधे में लगे लोगों की लिस्ट बनाकर बीच सड़क पर अवैध वसूली करते प्रतिदिन देखे जाते हैं। सूत्रों की मानें तो जिले के विभिन्न थाना व चौकियों में प्रतिदिन लाखों रुपए की वसूली की जाती है जो सिपाहियों द्वारा कोतवाल और थानेदारों के संरक्षण में प्रमुख रूप से हो रही है। इसके लिए खास सिपाहियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिनका संपर्क क्षेत्राधिकारी कार्यालय में भी देखा जाता है।

अपर महानिदेशक द्वारा अपराधों से अवैध वसूली के मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पेशल टीम का गठन कर संगठित अपराध से संबंधित थानेदारों कोतवालों को चिन्हित कर कार्यवाही का निर्देश दिया गया है।
ऐसे में सवाल यही उठता है कि अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित की गई स्पेशल टीम क्या जिले में हो रहे संगठित अपराधों से अवैध वसूली के जिम्मेदारों को चिन्हित कर उन्हें बेनकाब करते हुए अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट महानिदेशक को सौंपेगी या फिर पुलिस महकमे के बढ़ते भ्रष्टाचार में वह भी अपना हिसाब वसूल कर अपर पुलिस महानिदेशक को गुमराह करेगी।

योगीराज में पुलिसिया व्यवस्था पर यह बड़ा सवाल है।

अब यदि मौजूदा व्यवस्था देखें तो सवाल उठता है कि यदि स्पेशल टीम ने अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच अधिकारी को सौंप दी, तो जिले के दो तिहाई थानेदार और कोतवाल का पैदल होना तय है। इतना ही नहीं इन थानेदारों के निलम्बन के साथ बर्खास्तगी और कारखास सिपाहियों का निलंबन के साथ-साथ पुलिस महकमे से बर्खास्तगी भी हो सकती है।
अधिक जानकारी के लिए बने रहिए ए टी आई के साथ।

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