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स्कूल का डीपी बनाना चाहता था जबर्दस्ती का नाजायज संबंध ! मजूबर किये जाने के कारण पीड़िता खुशप्रीत ने की आत्महत्या

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दिल दहला देने वाला यह मामला है पंजाब के जिला जालंधर का जहाँ डे बोर्डिंग एसबीआरएस स्कूल के कक्षा 11 में पढ़ रही एक मासूम छात्रा के साथ स्कूल का डीपी ज़बरदस्ती कर नाजायज़ संबंध बनाना चाहता था जिससे तंग आकर पीड़िता ने खुदकुशी कर ली है। इस मामले में मृतका के परिजनों ने पुलिस पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए बताया है कि स्कूल प्रशासन के साथ ही साथ पुलिस प्रशासन भी आरोपी है क्योंकि उनके गुनाहों को छुपाने में पुलिस ने भरपूर सहयोग किया है।

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नाना जसवीर सिंह का कहना है कि छुट्टी के दिन भी खुशप्रीत कौर को स्कूल में बुलाया जाता था, खुशप्रीत नहीं जाना चाहती थी तो प्रिंसिपल की बेटी उसे जबरन स्कूल लेकर जाती थी। खुशप्रीत के नाना ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जब थाना मैहना पुलिस को खुशप्रीत कौर के सुसाइड करने की सूचना दी तो पुलिस ने पहले आरोपितों को सूचित कर उन्हें भगाने का काम किया फ़िर सूचना देने के एक घंटे बाद मैहना पुलिस मौके पर पहुँची। यही वजह है कि अभी तक किसी की गिरफ़्तारी भी नहीं की जा रही है।

खुशप्रीत कौर के मोबाइल फ़ोन में खुशप्रीत को ब्लैकमेल करने के सारे राज़ मौजूद हैं। उन्हें आशंका है कि पुलिस आरोपितों को बचाने के लिए मोबाइल फ़ोन का डाटा ख़त्म कर सकती है। इस बेहद संवेदनशील मामले में पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। डीएसपी धर्मकोट सुबेग सिंह व थाना प्रभारी मैहना जगविंदर सिंह ने मीडिया से भी दूरी बना ली है।

शनिवार को कई बार फ़ोन करने के बाद दोनों अधिकारियों ने फ़ोन तक पिक नहीं किया और न ही घटना के 48 घंटे बाद पुलिस किसी को भी गिरफ़्तार कर सकी है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जाँच में ये बात सामने आ रही है कि इस मामले में नामजद स्कूल का डीपी अमनदीप चाहल खुशप्रीत के साथ रिलेशन बनाना चाहता था और प्रिंसिपल हरप्रीत कौर की बेटी रवलीन कौर डीपी की इस इच्छा में उसकी मदद करती थी।

 

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घटना के 24 घंटे बाद प्रिंसिपल हरप्रीत कौर का कहना है कि उन्हें खुशप्रीत कौर के सुसाइड के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है और न ही उनसे कभी किसी ने खुशप्रीत कौर को लेकर कोई शिकायत की। मृतका के नाना जसवीर सिंह का कहना है कि प्रिंसिपल झूठ बोल रही हैं, उन्होंने जिस प्रकार से स्कूल में जाकर प्रिंसिपल को खूब खरी खोटी सुनाई थी उस दिन स्कूल का दूसरा स्टाफ भी वहाँ आ गया था, गार्ड तक आ गए थे, स्कूल के सीसीटीवी कैमरे चेक कर सारे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी।

 

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उन्होंने ये भी सवाल उठाया कि जब उन्होंने थाना मैहना पुलिस को खुशप्रीत के सुसाइड की सूचना दी तो उसके कुछ देर बाद ही स्कूल का डीपी व प्रिंसिपल परिवार के साथ स्कूल से फरार हो गए। आख़िर उन्हें सूचना किसने दी ?? उन्होंने साफ़ आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें भगाया है। और यही वजह है कि पुलिस ने अभी तक स्कूल के सीसीटीवी कैमरे की डीबीआर कब्जे में नहीं ली है। डीबीआर कब्जे में लेकर जाँच की जाए तो साफ़ हो जाएगा कि सुसाइड के कुछ देर बाद दोनों आरोपित स्कूल से फरार हुए हैं। जाँच अधिकारी एएसआई लखबीर सिंह का कहना है कि मामले की पड़ताल चल रही है, मोबाइल लैब में जाँच के लिए भेजा जा रहा है, आरोपितों की गिरफ़्तारी का पूरा प्रयास भी किया जा रहा है।

इस बीच में खुशप्रीत की घटना के बाद स्कूल के बच्चों से जो बातें सामने आ रही हैं वे बेहद गंभीर हैं, स्कूल हॉस्टल में आए दिन पार्टियाँ होती थीं, वहाँ बच्चों को नशा तक पहुँचता था, डीपी की भूमिका इसमें संवेदनशील रहती थी और स्कूल के बच्चों से अगर पूछताछ की जाए तो बहुत कुछ ऐसा सामने आ सकता है जिसकी किसी स्कूल कैंपस में कल्पना तक करना मुश्किल है। परिजनों की प्रशासन को सख़्त हिदायत दी गई है कि मामले की छानबीन में यदि कोई भी कोताही बरती गई तो उनसे बुरा कोई नहीं होगा।

उन्होंने साफ़ तौर पर आरोप लगाया है कि स्कूल के प्रिंसिपल, उनकी बेटी व डीपी ने मिलकर खुशप्रीत को दिमागी रूप से इतना प्रताड़ित कर दिया जिसके चलते उसे आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाना पड़ा।

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