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किसके प्यार की साक्षी हैं ये मंदिर

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किसके प्यार की साक्षी हैं ये मंदिर,

 

 

Radha Singh | 01-05-2020

 

प्यार

 

आज तक आपने कई प्रेम कहानियों के बारे में सुना और पढ़ा होगा जैसे रोमियो जुलियट, लैला मजनू या शायद आपने भी किसी ना किसी से प्यार तो किया ही होगा, नहीं भी किया तो आप ये जानते ही होंगे की लोग अपने प्यार के लिए क्या कुछ कर सकते हैं। वैसे कहा जाता है कि ताजमहल अमर प्रेम की निशानी है। जिसे शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था। लेकिन आप एक ऐसे मंदिर के बारे में नहीं जानते होंगे जिसे एक रानी ने अपने पति की याद में बनवाया था, तो आज हम आपको बताएंगे कि छत्तीसगढ़ के सिरपुर के उस लक्ष्मण मंदिर के बारे में जो भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक हैं।

 

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ये मंदिर रानी वास्टा देवी का अपने पति के लिए प्यार का साक्षी है। एक तरफ तो शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में सफेद संगमरमर से ताजमहल बनवाया, जो आज पूरे विश्व की धरोहर है। वहीं दूसरी तरफ एक विधवा रानी वास्टा देवी ने अपने पति हर्षगुप्त की याद में लाल ईंटों से ये मंदिर बनवाया जो आज भी विश्व धरोहर का हिस्सा बनने के लिए 1500 सालों से इंतजार कर रहा है। बता दें कि रानी वास्टा देवी ने ये मंदिर छठवीं शताब्दी में बनवाया था,लेकिन समय बीतता गया, शासक बदलते गए पर इस रानी के प्रेम के प्रतीक को वो महत्व नहीं मिला जिसका वो हकदार है।

 

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हर साल लाखों लोग देश विदेश से इस मंदिर को देखने आते हैं और लाल ईंटों से बने इस अनोखे मंदिर की तारीफ करते नहीं थकते। इस मंदिर में बहुत ही बारीकी से शानदार नक्काशी की गई है। जिसकी वजह से इस मंदिर की लोग काफी तारीफ भी करते हैं। वहीं सिरपुर के गाइड गोवर्धन प्रसाद कन्‍नौजे का कहना है कि यहां बहुत सी प्राकृतिक आपदाएं आई लेकिन रानी वास्टा देवी के प्रेम के प्रतीक की बुनियाद को हिला तक नहीं सकीं।

 

 

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इतिहासकार बताते हैं कि बारहवीं शताब्दी में यहां एक भयंकर भूकंप आया था, जिसमें राजमहल से लेकर सब कुछ ढह गया लेकिन वो भूकंप इस मंदिर को हिला तक ना सका। वहीं चौदहवीं शताब्दी में भी महानदी में एक बाढ़ आई जो सब कुछ बहा कर ले गई लेकिन इन दोनों बड़ी आपदाओं ने भी प्रेम के इस प्रतीक की बुनियाद को हिला नहीं पाया,तो देखा आपने कि प्यार में कितनी ताकत होती है।

 

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