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क्या सिंधिया बनेंगें” किंग मेकर”? या बीजेपी फिर महाराष्ट्र कि तरह खाएगी “चक्कर”

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क्या सिंधिया बनेंगें” किंग मेकर”? या बीजेपी फिर महाराष्ट्र कि तरह खाएगी “चक्कर”

मध्य प्रदेश की राजनीति में पिछले मंगलवार से शुरू हुए राजनीतिक गहमागहमी ने एक नया मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया ने अपना इस्तीफा ट्विटर पर डाला जिसमें उन्होंने लिखा है ’18 सालों से कांग्रेस का सदस्य रहने के बाद यह समय आगे बढ़ने का है।

कांग्रेस के अंदर रहकर मैं जनता की सेवा करने का अपना उद्देश्य पूरा नहीं कर पा रहा था.गौरतलब है कि सिंधिया के इस्तीफे के पीछे प्रदेश कांग्रेस सरकार में विशेष महत्व ना होने और केंद्र स्तर पर भी अनदेखी को एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

सिंधिया के इस्तीफा के बाद बेंगलुरु में रह रहे प्रदेश के छह राज्य मंत्रियों समेत कांग्रेस के 19 विधायकों ने भी विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है तो वहीं कांग्रेस ने भी सिंधिया को पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कांग्रेस से निकाले जाने का फरमान जारी कर दिया।क्या सिंधिया बनेंगें" किंग मेकर"? या बीजेपी फिर महाराष्ट्र कि तरह खाएगी "चक्कर"

 

 

मध्यप्रदेश की राजनीति में यह उठा-पठक पिछले मंगलवार से शुरू हुए जब कांग्रेस के करीब दस विधायक गायब हो गए। बाद में खबरे आईं कि वह भाजपा के संपर्क में हैं और भाजपा उनकी मदद से प्रदेश की कांग्रेस की सरकार गिराना चाहती है।

इसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित प्रदेश के तमाम नेता सक्रिय हुए और स्थिति को काबु करने की जद्दोजहद में जुट गए। लेकिन इ न सबके बीच प्रदेश राजनीति का एक बड़ा चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुप्पी सवाल खड़े कर रही थी क्योंकि प्रदेश की राजनीति में लगातार उनकी अनदेखी हो रही है।

क्या सिंधिया बनेंगें” किंग मेकर

हालांकि रविवार आते-आते कांग्रेस सरकार की स्थिति सुरक्षित नजर आने लगी। लेकिन सोमवार शाम को हालात फिर से सरकार के खिलाफ होते नजर आने लगे जब सिंधिया खेमे के 18 से 20 विधायक और 6 मंत्री लापता हो गये। छह मंत्रियों में प्रद्युमन सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, तुलसी सिलावट, इमरती देवी, गोविंद सिंह राजपूत और प्रभु चौधरी के नाम शामिल हैं.

विधायकों में जो नाम सामने आए हैं, उनमें राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव, मुन्नालाल गोयल, ओपीएस भदौरिया, रणवीर जाटव, गिर्राज दंडौतिया, कमलेश जाटव, रक्षा संतराम सिरौनिया, जसवंत जाटव, सुरेश धाकड़, जजपाल सिंह जज्जी, बृजेंद्र सिंह यादव और रघुराज सिंह कंषाना प्रमुख हैं।

स्थिति काबू से बाहर जाता देख सोमवार देर रात मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक बु लाई जिसमें मंत्रिमंडल के 28 में से 6 मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।हालाकि इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्रियों ने आश्वासन दिया कि सरकार सुरक्षित है। लेकिन इन सब के बीच सिंधिया खेमे के विधायक बगावत कर चुके थे और कांग्रेस को ये बात पता हो चुकी थी कि स्थिति अब उनके काबू में नही है ।

इस बीच मंगलवार को शाम 5 बजे सरकार पर आए इस संकट को दूर करने के लिए कमलनाथ ने विधायक दल की बैठक बुलाई थी।  लेकिन उससे पहले ही सिंधिया की प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह से मुलाकात हो गई । उन्होंने 9 मार्च को दिया अपना इस्तीफा ट्विटर , साथ ही सोनिया गांधी को भेजा। सोमवार को ही मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी सक्रिय हो गई थी। सोमवार को ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्ढा और गृहमंत्री अमित शाह से मिले।

सिंधिया ने थामा भाजपा का दामनसिंधिया ने थामा भाजपा का दामन

कांग्रेस छोड़ने के करीब 27 घंटे बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया बुधवार दोपहर 2.50 पर भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने की तीन वजहें बताईं। पहली वास्तविकता से इनकार करना, दूसरा जड़ता का माहौल और तीसरा नई सोच और नए नेतृत्व को मान्यता न दिया जाना। ज्योतिरादित्य ने 10 मिनट दिए गए भाषण में 4 बार मोदी का नाम लिया।

सिंधिया ने कहा कि उनके जीवन की दो अहम तारीखें हैं, पहली 30 सितंबर 2001 जब उनके पिता की मृत्यु हुई और दूसरी 10 मार्च 2020 जब उन्होंने अपने जीवन का अहम फैसला यानी कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया और बीजेपी ज्वॉइन किया।

इसी बीच भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाया। इस समय सिंधिया भोपाल में हैं, वे यहां शुक्रवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। शुक्रवार को ही राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किए जाने की आखिरी तारीख भी है।

क्या कहता है मध्यप्रदेश विधानसभा का नया समीकरण

22 विधायकों के इस्तीफे के बाद विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा गिरकर 104 पहुंच गया है.
22 इस्तीफों के बाद कांग्रेस की संख्या 114 से 92 हो गई है. हालांकि, मंगलवार शाम कमलनाथ की बैठक में कांग्रेस के 92 की बजाय 88 विधायक ही पहुंचे. लेकिन अब तक सपा-बसपा और निर्दलीयों की मदद से कांग्रेस के पास 99 विधायकों का समर्थन हासिल है।

वहीं भाजपा को कुल 107 विधायकों का समर्थन हासिल है। वहीं बीजेपी खेमे में भी 2 बागी विधायकों को निकाल दें तो कुल 105 विधायकों का समर्थन हासिल है।ऐसे में कयास यही लगाया जा रहा है कि 16 मार्च को बीजेपी कमलनाथ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी और फिर एक बार कमल खिलाएगी।

विधायकों के इस्तीफे के बाद बहुमत के लिए आंकड़ा: 104

कांग्रेस (गठबंधन) के पास आंकड़ा: 99

बीजेपी के पास आंकड़ा: 107

इतने विधायकों ने दिया इस्तीफा: 22

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